भोपाल: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा भोपाल में मध्य प्रदेश में बच्चों में पोषण (न्यूट्रिशन) की कमी पर सवाल उठाए जाने के बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। जीतू पटवारी ने धर्मेंद्र प्रधान का अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने एमपी की वास्तविक स्थिति को देश के सामने रखा है।
पोषण और गायों के बजट पर सवाल
जीतू पटवारी ने पोषण के लिए दिए जा रहे बजट की तुलना गौ-पालन के खर्च से करते हुए तंज कसा:
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पोषण का खर्च: बच्चों को प्रतिदिन पोषण के लिए ₹12 दिए जाते हैं।
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गायों पर खर्च: वहीं, कागजों में गायों के खाने पर प्रतिदिन ₹40 का खर्च दिखाया जाता है।
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वास्तविकता: उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे शासन का चित्र है जहां बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं और गौशालाओं में गायें दम तोड़ रही हैं, जबकि केवल बजट का खेल और फाइलों का हेरफेर दिखाई देता है।
शिक्षा से 56 लाख बच्चे लापता होने का आरोप
पटवारी ने सरकारी UDISE डेटा का हवाला देते हुए शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए:
| विवरण | वर्ष 2017-18 | वर्ष 2024-25 |
| कक्षा 1 से 12 तक कुल नामांकन | 1 करोड़ 60 लाख | 1 करोड़ 04 लाख |
| लापता बच्चे (7 साल में) | – | 56 लाख |
पटवारी ने सरकार से पूछा कि ये 56 लाख बच्चे कहाँ गए? क्या ये ड्रॉप-आउट हैं, या इन्हें बाल मजदूरी और बाल विवाह की भेंट चढ़ा दिया गया?
₹30,000 करोड़ अतिरिक्त बजट कहाँ गया?
पटवारी ने स्कूल शिक्षा के बजट में हुई भारी वृद्धि के बावजूद सुविधाओं में कमी को उजागर किया:
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बजट वृद्धि: 2017 में स्कूल शिक्षा का बजट ₹7000 करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर ₹37000 करोड़ हो गया है (यानी ₹30,000 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि)।
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सुविधाओं की कमी:
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बच्चों को मिड-डे मील में सूखी रोटी और नमक मिल रहा है, सेब, अंजीर, बादाम, दूध का नामोनिशान नहीं है।
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14,000 से अधिक स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक है।
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10,000 स्कूल बिना प्रिंसिपल के चल रहे हैं।
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25% स्कूलों में विज्ञान और गणित के शिक्षक नहीं हैं।
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प्रश्न: जीतू पटवारी ने सवाल किया कि यह ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त बजट कहाँ गया? “मिड-डे मील माफिया, आउटसोर्सिंग ठेकेदार, कमीशनखोर अफसर और नेताओं की जेब में तो नहीं पहुंचा?”
उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने ही साबित कर दिया कि कांग्रेस जो कह रही थी, वह 100% सच था।








