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उचेहरा में ‘मौत का पुल’: ड्यूटी जा रहे युवा डॉक्टर की कार 30 फीट नीचे नदी में गिरी, सिस्टम की लापरवाही से गई जान!

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के उचेहरा कस्बे में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में ...

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| सतना टाइम्स

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के उचेहरा कस्बे में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। उचेहरा शासकीय अस्पताल में कार्यरत युवा डॉक्टर शशांक सेठिया (24 वर्ष) की कार अनियंत्रित होकर बरुआ नदी में जा गिरी। गंभीर चोटों के कारण अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नदी पर बने पुराने पुल पर सेफ्टी वॉल (सुरक्षा दीवार) न होने की प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम माना जा रहा है।

ड्यूटी जाते समय हुआ हादसा

  • समय: गुरुवार सुबह लगभग 11 बजे।
  • स्थान: ऊँचेहरा में बरुआ तिराहे के पास पुराना पुल।
  • घटना: डॉ. शशांक अपनी कार से अस्पताल ड्यूटी के लिए निकले थे। पुराने पुल पर पहुँचते ही उनकी कार अचानक बेकाबू हुई और सीधे 30 फीट नीचे बरुआ नदी में जा गिरी।

जान बचाने वाले भी हुए नाकाम

कार को नदी में डूबता देख स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया।

  • बचाव टीम: काशी दीन मल्लाह, हेड कॉन्स्टेबल रामकरण प्रजापति, संतोष वर्मा, एएसआई एसएन उपाध्याय और कुछ स्थानीय युवक।
  • प्रयास: टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में छलांग लगाई, कड़ी मशक्कत के बाद कार को किनारे तक खींचा और बेहोशी की हालत में डॉक्टर को बाहर निकाला।

डॉक्टर शशांक को तुरंत उचेहरा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सतना रेफर किया गया। हालांकि, अस्पताल पहुँचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

पिता ने दिवाली पर गिफ्ट की थी कार

इस दुखद हादसे का एक मार्मिक पहलू यह है कि जिस कार में डॉ. शशांक सवार थे, वह उनके पिता अरुण गुप्ता (सेवानिवृत्त शिक्षक) ने हाल ही में दिवाली से पहले उन्हें उपहार में दी थी।

डॉ. शशांक अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे और एक साल पहले ही उन्होंने उचेहरा सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं देना शुरू किया था।

‘मौत का पुल’ बनी पुलिया

स्थानीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि इस हादसे की वजह पुल की बनावट और प्रशासन की अनदेखी है।

“बरुआ नदी पर बने इस पुराने पुल के एक तरफ सेफ्टी वॉल ही नहीं है। सुरक्षा दीवार न होने के कारण यह पुल ‘मौत का पुल’ बन चुका है।” — स्थानीय निवासी।

लोगों का कहना है कि करीब एक साल पहले भी इसी जगह से एक बाइक सवार नदी में गिर गया था। यदि समय रहते पुल पर रेलिंग या दीवार बना दी गई होती, तो आज एक युवा डॉक्टर की जान बचाई जा सकती थी।

पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें