सिवनी/लखनादौन। नगर परिषद लखनादौन में चट्टी से बस स्टैंड मार्ग पर निर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आवंटन में हुए भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। ईओडब्ल्यू (EOW) जबलपुर की जांच में सामने आया है कि रसूखदारों को लाभ पहुंचाने के लिए न केवल नियमों को ताक पर रखा गया, बल्कि बिना पूरी राशि जमा कराए दुकानों का कब्जा भी दे दिया गया।

नियमों को ताक पर रखकर ‘मुफ्त’ में बांटी दुकानें
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की 75 दुकानों की नीलामी के कड़े नियम थे, जिनका उल्लंघन किया गया:
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नियम: नीलामी के 21 दिन के भीतर 25% राशि और 120 दिन में शेष राशि जमा करना अनिवार्य था। इसके बाद ही अनुबंध (Agreement) और कब्जा मिलना था।
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गड़बड़ी: 13 दुकानदारों ने 79.82 लाख रुपये की नीलामी राशि जमा ही नहीं की, फिर भी उन्हें कब्जा दे दिया गया।
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किराया वसूली: करीब 2.88 लाख रुपये का मासिक किराया भी वसूल नहीं किया गया, जिससे कुल 83 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
आरक्षित दुकानों में भी खेल
जांच में खुलासा हुआ कि आरक्षित वर्ग (Reserved Category) के लिए तय दुकानों को अवैध रूप से सामान्य वर्ग के लोगों को दे दिया गया। नियमतः तीन बार नीलामी विफल होने पर ही श्रेणी बदली जा सकती थी, लेकिन अधिकारियों ने पीआईसी (PIC) की बैठक में मनमाना प्रस्ताव पारित कर चहेतों को लाभ पहुंचाया।
इन दिग्गजों पर दर्ज हुई FIR
ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मुख्य आरोपियों में शामिल हैं:
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मीना बलराम गोल्हानी: नगर परिषद अध्यक्ष, लखनादौन।
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गजेंद्र पांडे व गीता वाल्मीक: तत्कालीन सीएमओ (CMO)।
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रवि गोल्हानी: वर्तमान राजस्व उपनिरीक्षक।
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पीआईसी सदस्य: देवकी झारिया, संगीता गोल्हानी, वर्षा गोल्हानी, अनीता जैन, और सविता कुमरे।
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इनके अलावा 14 दुकानदारों पर भी मिलीभगत का केस दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता ने खोली पोल
जबलपुर निवासी रविंद्र सिंह आनंद की शिकायत पर यह पूरी जांच शुरू हुई थी। ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई से नगर परिषद के गलियारों में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार के इस मामले में अब गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू होने की संभावना है।








