रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में MPPSC की राज्य पात्रता परीक्षा (SET) के दौरान एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) से परीक्षा देने आई एक अमृतधारी सिख छात्रा गुरलीन कौर ने आरोप लगाया है कि चेकिंग के नाम पर महिला स्टाफ ने न केवल उसकी पगड़ी (दुमाला) उतरवाई, बल्कि उसकी कृपाण भी अलग रखवा दी। इस घटना के बाद सिख समुदाय में भारी आक्रोश है और परीक्षा केंद्र के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया।

चेकिंग के नाम पर ‘धार्मिक अपमान’ का आरोप
सागोद रोड स्थित उत्कृष्ट विद्यालय में दोपहर 12 बजे की शिफ्ट से पहले यह घटना हुई। छात्रा का आरोप है कि महिला स्टाफ उसे एक अलग कमरे में ले गईं और अनिवार्य धार्मिक प्रतीकों—पगड़ी और कृपाण—को उतारने का दबाव बनाया।
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छात्रा का बयान: “मैं पहले भी कई परीक्षाएं दे चुकी हूँ, लेकिन ऐसा अपमान कभी नहीं हुआ। यह हमारे धर्म की अनिवार्य परंपरा है, जिसे जबरन हटवाया गया।”
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सिख समाज का विरोध: श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष अवतार सिंह सलूजा ने इसे ‘मेंटल ट्रॉमा’ बताते हुए कहा कि अमृतधारी सिखों के लिए पांच ‘क’ (ककार) का पालन अनिवार्य है और इस कार्रवाई ने उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।
प्रशासन की सफाई: ‘अज्ञानतावश हुई गलती’
विवाद बढ़ते देख एसडीएम (SDM) विवेक सोनकर और सीएसपी समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
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केंद्र अधीक्षक की माफी: परीक्षा केंद्र अधीक्षक सुभाष कुमावत ने मामले को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा, “चेकिंग आयोग के निर्देशों के तहत की गई थी। मुमकिन है कि अज्ञानतावश ऐसा हुआ हो। हमारा इरादा किसी की आस्था को ठेस पहुँचाना नहीं था। यदि ऐसा हुआ है, तो मैं माफी माँगता हूँ।”
MP में फिर गरमाया ‘ड्रेस कोड’ विवाद
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में मध्य प्रदेश के सिरपुर में हिजाब को लेकर विवाद सामने आया था, जहाँ कक्षा 8 की छात्राओं को हिजाब हटाने के लिए मजबूर करने और नंबर काटने की धमकी देने के आरोप लगे थे। अब पगड़ी उतरवाने के मामले ने आग में घी डालने का काम किया है।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
प्रशासनिक अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एग्जाम स्टाफ को संवेदनशील रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एग्जाम गाइडलाइंस में धार्मिक पगड़ी को अनिवार्य रूप से उतरवाने का कोई नियम नहीं है।








