सतना। शाकाहार के नाम पर मांसाहार परोसने वाली एक मल्टीनेशनल पिज्जा कंपनी को सतना जिला उपभोक्ता फोरम ने कड़ा सबक सिखाया है। दीपावली के शुभ अवसर पर एक शाकाहारी दंपति की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और उन्हें शारीरिक कष्ट पहुँचाने के मामले में फोरम ने कंपनी पर 8 लाख रुपये का ऐतिहासिक जुर्माना लगाया है।
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दीपावली के दिन परोसा ‘अपवित्र’ खाना
घटना 31 अक्टूबर 2024 की है, जब शहर की निवासी नैंसी तिवारी अपने पति सूरज के साथ पन्ना नाका स्थित नामी पिज्जा आउटलेट पर गई थीं। दंपति ने वेज पिज्जा और बर्गर का ऑर्डर दिया था। आरोप है कि जैसे ही उन्होंने बर्गर खाना शुरू किया, उन्हें तेज उल्टियां होने लगीं। बारीकी से जांच करने पर पता चला कि वेज बर्गर के अंदर सूअर का मांस (Pork) परोसा गया था।
डेढ़ साल की कानूनी जंग और इंसाफ
पीड़ित दंपति ने जब शोरूम संचालक से शिकायत की, तो प्रबंधन ने अपनी गलती मानने के बजाय बदतमीजी की। इसके बाद यह मामला पुलिस और फिर उपभोक्ता फोरम तक पहुंचा।
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FIR: सिविल लाइन थाने में 5 सितंबर 2025 को मामला दर्ज हुआ।
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दलील: अधिवक्ता करुणेश अरोरा ने कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश किए कि किस तरह कंपनी की लापरवाही ने एक परिवार की धार्मिक आस्था और सेहत के साथ खिलवाड़ किया।
कोर्ट का कड़ा रुख: 8 लाख का मुआवजा और ब्याज
जिला उपभोक्ता फोरम ने 27 फरवरी 2026 को सुनाए अपने फैसले में कंपनी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने आदेश दिया है कि:
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8 लाख रुपये का जुर्माना मानसिक संताप और सेवा में कमी के लिए देना होगा।
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10 हजार रुपये कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में देने होंगे।
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कुल राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
एक महीने की मोहलत, वरना जेल
फोरम ने सख्त निर्देश दिया है कि जुर्माने की पूरी राशि एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। यदि कंपनी ऐसा करने में विफल रहती है, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत दंडात्मक कार्रवाई (जेल या कुर्की) की जाएगी।
उपभोक्ताओं के लिए सबक
यह मामला उन सभी फूड आउटलेट्स के लिए चेतावनी है जो क्वालिटी कंट्रोल में लापरवाही बरतते हैं। साथ ही, यह ग्राहकों को जागरूक करता है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।








