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BREAKING NEWS : इंदौर-मुंबई रेल लाइन के लिए कटेंगे सवा लाख से ज़्यादा पेड़, पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

महू-खंडवा आमान परिवर्तन परियोजना: विकास बनाम पर्यावरण की जंग इंदौर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में एक महत्वपूर्ण रेल परियोजना के लिए 1.24 ...

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| सतना टाइम्स

महू-खंडवा आमान परिवर्तन परियोजना: विकास बनाम पर्यावरण की जंग

इंदौर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में एक महत्वपूर्ण रेल परियोजना के लिए 1.24 लाख से अधिक पेड़ों को काटने की योजना बनाई जा रही है, जिससे पर्यावरणविदों में गहरी चिंता पैदा हो गई है। यह परियोजना महू-खंडवा आमान परिवर्तन के तहत रेलवे की ऐतिहासिक छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलेगी, जिससे इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी कम होगी और पश्चिमी मध्य प्रदेश का दक्षिण भारत से संपर्क मजबूत होगा।

परियोजना का विवरण:

  • प्रभावित पेड़: महू-सनावद खंड के निर्माण के लिए 1.41 लाख पेड़ प्रभावित होने का अनुमान है, जिनमें से 1.24 लाख पेड़ निश्चित रूप से कटेंगे।
  • वन क्षेत्र प्रभावित: इंदौर और खरगोन जिलों में कुल 450 हेक्टेयर (इंदौर में 404 हेक्टेयर और खरगोन में 46 हेक्टेयर) वन क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।
  • रेल लाइन की लंबाई: 156 किलोमीटर लंबी बड़ी रेल लाइन बिछाई जाएगी।
  • कार्य पूरा होने का लक्ष्य: अधिकारियों के अनुसार, परियोजना 2027-28 तक पूरी हो सकती है।

पर्यावरण पर प्रभाव और भरपाई की योजना:

यह परियोजना घने जंगलों से होकर गुजरेगी, जिसके कारण आबो-हवा पर पड़ने वाले बुरे असर को लेकर पर्यावरणविदों ने आगाह किया है।

  • पर्यावरणविदों की चेतावनी: पर्यावरणविद शंकरलाल गर्ग ने चेताया है कि चोरल और महू के घने जंगलों में बड़ी तादाद में पेड़ कटने से इंदौर जैसे शहर की बारिश और तापमान पर असर होगा, साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ेगा।
  • वन विभाग का पक्ष: वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) प्रदीप मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार से सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। वन विभाग ने पेड़ कटाई से वन्य जीवन, मिट्टी और नमी पर होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने की विस्तृत योजना बनाई है।
  • पौधारोपण की योजना: पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए काटे जाने वाले क्षेत्र के दोगुने क्षेत्र में पौधे रोपे जाएंगे। धार और झाबुआ जिलों के वन मंडलों में कुल 916 हेक्टेयर में (प्रति हेक्टेयर 1,000 पौधे) लगाए जाएंगे। पहाड़ी क्षेत्र में रेल लाइन के लिए सुरंगें बनने के कारण भी कई पेड़ बच जाएंगे।

यह परियोजना पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई और दीर्घकालिक प्रभावों को कम करने की चुनौती बड़ी है।


 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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