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भोपाल गैस त्रासदी की बरसी पर बड़ा विरोध: पीथमपुर के लोग बोले- ‘यूनियन कार्बाइड की जहरीली राख कहीं और ले जाओ’

पीथमपुर (धार): भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी (3 दिसंबर) पर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के ...

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| सतना टाइम्स

पीथमपुर (धार): भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी (3 दिसंबर) पर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के निवासियों ने राज्य सरकार से बड़ी मांग की है। नागरिकों ने अपील की है कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड (UC) कारखाने के जहरीले कचरे को भस्म करने के बाद उत्पन्न हुई करीब 900 टन राख को निपटारे के लिए इस औद्योगिक क्षेत्र से हटाकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाया जाए।

भस्म होने के बाद अब राख पर विवाद

यूनियन कार्बाइड कारखाने के विषैले कचरे को भोपाल से करीब 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में लाया गया था।

  • निपटान प्रक्रिया: अधिकारियों के अनुसार, संयंत्र में UC कारखाने के कुल 358 टन विषैले अपशिष्ट (जिसमें 337 टन अपशिष्ट और 19 टन संदूषित मिट्टी शामिल थी) को अलग-अलग चरणों में भस्म करने की प्रक्रिया इस साल जुलाई की शुरुआत में संपन्न हुई थी।

  • वर्तमान स्थिति: फिलहाल, यह लगभग 900 टन जहरीली राख पीथमपुर के संयंत्र के ‘लीक-प्रूफ स्टोरेज शेड’ में सुरक्षित रखी गई है।

हाई कोर्ट भी लैंडफिल के विरोध में

स्थानीय लोगों की आशंकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक हालिया आदेश से बल मिला है।

  • हाई कोर्ट का फैसला: हाई कोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने 8 अक्टूबर को इस संयंत्र के परिसर में निर्माणाधीन विशेष बहुपरतीय विशाल गड्ढे (लैंडफिल सेल) में इस राख का निपटारा करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

  • कारण: अदालत ने कहा था कि यह निपटान इकाई इंसानी आबादी के बेहद नजदीक है और इंसानी आबादी के निकट विषैली राख का निस्तारण स्वीकार्य नहीं है।

  • पारे का स्तर: अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि जांच के दौरान राख में मौजूद मर्करी (पारा) का स्तर स्वीकृत सीमा से अधिक पाया गया था।

स्थानीय लोगों की सुरक्षा चिंताएं

धार जिले का यह संयंत्र पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के तारपुरा गांव से एकदम सटा हुआ है, जहां करीब 20,000 की आबादी निवास करती है।

  • आशंका: स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर ‘लैंडफिल सेल’ में कोई गड़बड़ी होती है, तो मानवीय आबादी और आबो-हवा को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

  • स्वास्थ्य समस्याएं: तारपुरा निवासी निर्मला पंवार ने दावा किया कि गांव के लोगों को अक्सर सर्दी-जुकाम, बुखार और आंखों में जलन की समस्या रहती है, और वे पास के जलस्रोतों से पीने का पानी नहीं लेते क्योंकि वह गंदा दिखाई देता है।

  • मांग: सामाजिक कार्यकर्ता अनिल द्विवेदी ने कहा, “हम चाहते हैं कि राज्य सरकार अदालत के निर्देश का पालन करे। कचरे की राख का निपटारा पीथमपुर के बजाय ऐसी जगह किया जाए जहां इंसानी आबादी और पर्यावरण को किसी भी तरह के नुकसान का खतरा न हो।”

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह राख के निपटान के लिए वैकल्पिक स्थलों का उल्लेख करते हुए एक रिपोर्ट दाखिल करे।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें