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MP में ई-चालान का ‘महा-विस्फोट’: 3 साल में 2000% का उछाल; सड़क से पुलिस ‘गायब’, पर कैमरों ने काटे 18 लाख चालान, देश में 7वें नंबर पर मध्य प्रदेश

भोपाल। मध्य प्रदेश में अब ट्रैफिक नियम तोड़ना आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के ताजा ...

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| सतना टाइम्स

भोपाल। मध्य प्रदेश में अब ट्रैफिक नियम तोड़ना आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के ताजा आंकड़ों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। राज्य में पिछले तीन वर्षों में ई-चालान की संख्या में 2000% की अविश्वसनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साल 2023 में जहां महज 90 हजार ई-चालान कटे थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 18.15 लाख के पार पहुंच गया है। अब राज्य ट्रैफिक उल्लंघन के मामले में देश में सातवें स्थान पर आ गया है।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • डिजिटल स्ट्राइक: 2024 में 13 लाख से बढ़कर 2025 में 18 लाख हुए ई-चालान; 40% की वार्षिक वृद्धि।

  • मैनुअल चालान का अंत: पूरे साल में पुलिस ने हाथ से सिर्फ 1,417 चालान काटे, बाकी सब कैमरों का कमाल।

  • नया नियम (2026): चालान मिलने के 45 दिनों के भीतर एक्शन लेना अनिवार्य, वरना ‘जुर्म’ कबूल माना जाएगा।

  • टॉप राज्यों में एंट्री: यूपी, गुजरात और दिल्ली के बाद एमपी अब ट्रैफिक उल्लंघन का नया केंद्र।


आंकड़ों की जुबानी: ई-चालान का सफर

मध्य प्रदेश में मैन्युअल पुलिसिंग की जगह अब ‘स्मार्ट सर्विलांस’ ने ले ली है। पिछले तीन सालों का डेटा कुछ इस तरह है:

  • साल 2023: 90,000 ई-चालान

  • साल 2024: 13,00,000 ई-चालान

  • साल 2025: 18,15,000+ ई-चालान

  • मैनुअल चालान (2025): मात्र 1,417 (यानी 99% से ज्यादा चालान कैमरों ने काटे)।

जनवरी 2026 से बदले नियम: अब नहीं चलेगा ‘टालमटोल’

सेंट्रल मोटर व्हीकल्स (द्वितीय संशोधन) नियम के तहत अब वाहन मालिकों के लिए प्रक्रिया बेहद सख्त कर दी गई है:

  1. 45 दिन की डेडलाइन: चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर आपको या तो जुर्माना भरना होगा या साक्ष्यों के साथ पोर्टल पर आपत्ति दर्ज करनी होगी।

  2. स्वीकृति का प्रावधान: यदि 45 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो सिस्टम इसे आपकी गलती मान लेगा और अगले 30 दिनों में भुगतान अनिवार्य हो जाएगा।

  3. कोर्ट का रास्ता: यदि आपकी आपत्ति खारिज होती है, तो आप जुर्माना राशि का 50% जमा करके अदालत में अपील कर सकते हैं।


सड़क सुरक्षा या सिर्फ राजस्व?

प्रशासन का तर्क है कि डिजिटल सर्विलांस से पारदर्शिता आई है और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। हालांकि, सड़कों पर पुलिस की अनुपस्थिति और केवल कैमरों पर निर्भरता ने आम नागरिकों के बीच चर्चा छेड़ दी है। मध्य प्रदेश में अब रेड लाइट जंप करना, हेलमेट न पहनना या ओवरस्पीडिंग करना सीधे आपके मोबाइल पर ‘मैसेज’ और बैंक खाते पर ‘चोट’ बनकर पहुँच रहा है।

“स्मार्ट कैमरों के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। ई-चालान की बढ़ती संख्या दर्शाती है कि तकनीक अब इंसानी आंखों से ज्यादा सतर्क है। नागरिकों को नियमों के प्रति जागरूक होना ही होगा।”

यातायात विभाग, मध्य प्रदेश

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें