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भोपाल मेट्रो: ‘सपनों की पटरी पर अटकी तारीखें’, लागत हुई दोगुनी पर काम हुआ आधा!

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो का सपना अब तक हकीकत नहीं बन सका है, और परियोजना की हालत ‘सपनों की ...

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| सतना टाइम्स

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो का सपना अब तक हकीकत नहीं बन सका है, और परियोजना की हालत ‘सपनों की पटरी पर अटकी तारीखें’ जैसी हो गई है। हैरानी की बात यह है कि इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹6,941 करोड़ से बढ़कर अब ₹10,033 करोड़ हो चुकी है, लेकिन कई स्टेशनों पर सिविल और सुरक्षा संबंधी काम अभी भी अधूरे हैं।

तारीखों का लंबा इंतज़ार

  • घोषणा: भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट की घोषणा 2009 में हुई थी।
  • DPR: 2016 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप दिया गया।
  • लक्ष्य: 2018 में केंद्र से मंजूरी मिली और 2022 तक मेट्रो शुरू होने का दावा किया गया था।
  • मौजूदा स्थिति: दो साल की देरी के बाद भी मेट्रो पटरी पर दोबारा नहीं दौड़ पाई है, जबकि चुनाव से ठीक पहले 3 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसमें बैठे थे।

काम आधा, खामियां ज़्यादा

परियोजना की लागत दोगुनी होने के बावजूद, काम की गति धीमी है और पुराने कामों में भी खामियां सामने आ रही हैं।

  • पिलर की समस्या: केंद्रीय विद्यालय मेट्रो स्टेशन के पिलर्स इतने छोटे बनाए गए हैं कि भारी वाहन टकराने का खतरा बना हुआ है। अब इन पिलर्स के नीचे तीन फीट गहरी खुदाई कर जगह बनाई जा रही है।
  • अधूरे स्टेशन: कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम निरीक्षण के लिए आ चुकी है, लेकिन कई जगहों पर 30 फीसद से ज़्यादा सिविल तक का काम अधूरा है।
    • रानी कमलापति स्टेशन: रैंप अधूरा और नाली खुदी हुई है।
    • एम्स स्टेशन: सिर्फ ढांचा तैयार है, एंट्री-एग्जिट का काम अधूरा है।
    • दिव्यांग सुविधा: लगभग किसी भी स्टेशन में दिव्यांगों के लिए रैंप तैयार नहीं है।

टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ ने इसे गलत प्लानिंग का नतीजा बताया है, जिसके कारण क्रियान्वयन में भी गलतियाँ हो रही हैं।

CMRS की मंज़ूरी का इंतज़ार

मेट्रो को पटरी पर दौड़ाने के लिए अब कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की मंज़ूरी का इंतज़ार है।

  • निरीक्षण: मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) जनक कुमार गर्ग की टीम भोपाल पहुँच चुकी है।
  • अगला कदम: निरीक्षण के बाद रिपोर्ट मेट्रो कॉरपोरेशन को सौंपी जाएगी, जिसे कॉरपोरेशन राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बाद ही भोपाल मेट्रो की शुरुआत की नई तारीख तय की जाएगी।

फिलहाल, एम्स से सुभाष नगर के बीच केवल 6.22 किलोमीटर का ‘प्रायोरिटी कॉरिडोर’ ही तैयार हो रहा है, जबकि पहला रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है।

राजनीति मेट्रो से तेज़, काम धीमा

मेट्रो भले ही ट्रैक पर न हो, लेकिन सियासत फुल स्पीड से दौड़ रही है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल इस परियोजना का श्रेय लेने की होड़ में हैं।

  • कांग्रेस का आरोप: पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने ₹7,000 करोड़ की परियोजना कमलनाथ के समय शुरू होने का दावा करते हुए बीजेपी सरकार की लापरवाही और ठेकेदारों के भ्रष्टाचार को देरी का कारण बताया।
  • बीजेपी का पलटवार: नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने दावा किया कि इंदौर-भोपाल में मेट्रो की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी की देन है और भोपाल को जल्द ही मेट्रो की सौगात मिलेगी।

इस राजनीतिक खींचतान के बीच, भोपाल मेट्रो के ट्रैक पर दौड़ने के लिए एक नई तारीख ही तय होती दिख रही है, क्योंकि परियोजना की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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