भोपाल (मध्य प्रदेश):नवाबों और बेगमों के ऐतिहासिक शहर भोपाल के गौरवमयी इतिहास में शनिवार को एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया। भोपाल की पटरियों पर जब पहली बार मेट्रो ट्रेन दौड़ी, तो उसकी कमान एक महिला के हाथों में थी। जाह्नवी गोस्वामी ने भोपाल मेट्रो की पहली ट्रेन ऑपरेटर बनकर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है।
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बचपन का कौतूहल बना करियर
मूलतः मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहने वाली जाह्नवी के लिए यह सफर किसी सपने के सच होने जैसा है। जाह्नवी बताती हैं कि बचपन में जब वह रेल से सफर करती थीं, तो हमेशा यह सोचती थीं कि इतनी भारी ट्रेन चलती कैसे है? इसके ब्रेक कैसे लगते होंगे? बचपन की वही जिज्ञासा उन्हें प्रतियोगी परीक्षा और कठिन ट्रेनिंग के बाद आज मेट्रो के आधुनिक केबिन तक ले आई।
महज 114 दिन की ट्रेनिंग और बड़ी जिम्मेदारी
भोपाल मेट्रो में सुपरवाइजर ग्रेड-II (ऑपरेशंस) के पद पर तैनात जाह्नवी को इस ऐतिहासिक रन के लिए तैयार करने में 114 दिनों का समय लगा। इस दौरान उन्होंने:
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दिल्ली मेट्रो के विशेषज्ञों से कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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मेट्रो की आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों को बारीकी से समझा।
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जाह्नवी गर्व से कहती हैं कि उन्हें प्रशिक्षित करने वाली गुरु भी महिलाएं ही थीं।
बेगमों के शासन के बाद ‘महिला शक्ति’ का नया उदय
भोपाल का इतिहास चार शक्तिशाली बेगमों के शासन के लिए जाना जाता है। सदियों बाद, जाह्नवी का मेट्रो केबिन में होना यह साबित करता है कि शहर का नेतृत्व आज भी सुरक्षित और सक्षम हाथों में है। MPMRCL के डीजीएम ऑपरेशंस, अशोक खरे के अनुसार, जाह्नवी की भूमिका भारतीय रेलवे के ‘लोको पायलट’ के समान है, लेकिन मेट्रो की भाषा में उन्हें ‘ट्रेन ऑपरेटर’ कहा जाता है।
एक दिलचस्प वाकया
लॉन्च के दौरान एक मजेदार पल भी आया। सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी कारणों से जाह्नवी वीवीआईपी मेहमानों के साथ यात्रा नहीं कर पाईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि ऑपरेशनल सुरक्षा के चलते “केबिन बंद था”, लेकिन उनके चेहरे की खुशी पूरी जिम्मेदारी और उपलब्धि का अहसास करा रही थी। पिता सरकारी कर्मचारी और मां गृहिणी हैं, जाह्नवी ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत को दिया है।








