भोपाल के फेफड़े कहे जाने वाले केरवा और कलियासोत जलाशयों को भू-माफियाओं और अवैध निर्माणों से मुक्त कराने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में सरकार ने स्वीकार किया है कि ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ और ग्रीन बेल्ट के नियमों को ताक पर रखकर यहाँ स्कूल, रेस्टोरेंट और फार्म हाउस तान दिए गए थे। राजधानी के सबसे संवेदनशील ईको-सेंसिटिव जोन में शामिल इन जलाशयों के संरक्षण के लिए भोपाल विकास योजना 2005 के नियमों को अब कड़ाई से लागू किया जा रहा है।

अवैध निर्माणों का ‘कच्चा चिट्ठा’
सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, कुल 96 निर्माण अवैध पाए गए हैं जो ग्रीन बेल्ट और जलाशयों के कैचमेंट एरिया में आते हैं:
-
सरकारी जमीन पर कब्जा: 84 निर्माण सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाए गए हैं।
-
निजी जमीन पर उल्लंघन: 12 निर्माण निजी जमीन पर हैं, लेकिन वे ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ के दायरे में आते हैं।
-
फुल टैंक लेवल (FTL) का खतरा: केरवा जलाशय के 33 मीटर के अति-संवेदनशील दायरे में 16 पक्के निर्माण मिले हैं, जिनमें से 2 सरकारी और 14 निजी हैं।
150 हेक्टेयर में ‘ग्रीन रिवॉल्यूशन’
अतिक्रमण हटाने के बाद सरकार की योजना इस बेशकीमती जमीन को प्रकृति को सौंपने की है:
-
बॉटनिकल गार्डन: टीएंडसीपी (T&CP) विभाग ने 150 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशाल बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क विकसित करने का मैप तैयार कर लिया है।
-
सीमांकन और फेंसिंग: कलेक्टर भोपाल को निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व रिकॉर्ड और मास्टर प्लान के मैप को सुपरइम्पोज कर जमीन को सुरक्षित करें और बाउंड्री वॉल बनाएं।
अब तक की बड़ी कार्रवाई
-
फरवरी का एक्शन: 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद प्रशासन एक्शन मोड में आया।
-
बुलडोजर प्रहार: 28 फरवरी 2026 को 28 अवैध निर्माणों को पहले ही जमींदोज किया जा चुका है।
-
बेदखली वारंट: बाकी बचे अतिक्रमणकारियों के खिलाफ राजस्व कोर्ट से बेदखली वारंट जारी हो चुके हैं।
क्यों जरूरी है यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’?
-
वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: यह क्षेत्र न केवल जल संरक्षण के लिए अहम है, बल्कि यह बाघों (Tigers) और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक कॉरिडोर भी है।
-
जल स्तर: केरवा-कलियासोत भोपाल के ग्राउंड वॉटर लेवल को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
-
होटल-रेस्टोरेंट का जाल: पिछले कुछ सालों में यहाँ अवैध रूप से रिजॉर्ट और रेस्टोरेंट की बाढ़ आ गई थी, जिससे ईको-सिस्टम बिगड़ रहा था।
केरवा-कलियासोत एक्शन: मुख्य बिंदु
| विवरण | जानकारी |
| कुल अवैध निर्माण | 96 (84 सरकारी + 12 निजी जमीन पर) |
| नियम का उल्लंघन | भोपाल मास्टर प्लान 2005 (क्लॉज 2.57) |
| भविष्य की योजना | 150 हेक्टेयर में बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क। |
| संवेदनशील जोन | फुल टैंक लेवल (FTL) से 33 मीटर का दायरा। |
| निगरानी | नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सीधी नजर। |








