भोपाल (मध्य प्रदेश):राजधानी भोपाल के कमला नगर इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने ममता और नियति के क्रूर खेल को उजागर कर दिया है। अपनी 2 साल की मासूम बेटी की एक छोटी सी खुशी (गुब्बारा) को बचाने की कोशिश में गंभीर रूप से घायल हुई महिला पटवारी मीनाक्षी पटेल की सोमवार को मौत हो गई। करीब 10 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
घटना 11 दिसंबर की शाम की है। रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील में पदस्थ 32 वर्षीय मीनाक्षी पटेल अपनी दो साल की बेटी के साथ छत पर खेल रही थीं। खेल-खेल में बच्ची का गुब्बारा उड़कर पड़ोसी के टीन शेड पर जा गिरा। अपनी बेटी को रोता देख मीनाक्षी उसे खुश करने के लिए गुब्बारा उठाने बालकनी से पड़ोसी के शेड की ओर बढ़ीं।
जैसे ही उन्होंने शेड पर कदम रखा, उनका संतुलन बिगड़ गया और वे टीन की चादरें तोड़ती हुई सीधे नीचे जा गिरीं। इस हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई और दिमाग में खून जम गया।
11 दिनों तक चला इलाज, पति सेना में तैनात
हादसे के तुरंत बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मीनाक्षी के पति देश की सेवा में सेना (Army) में तैनात हैं, वहीं उनके ससुर पुलिस मुख्यालय (PHQ) में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। मीनाक्षी 3 साल पहले ही विवाह बंधन में बंधी थीं और कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर भोपाल आई थीं।
पूरे इलाके में शोक की लहर
सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब मीनाक्षी का शव परिजनों को सौंपा गया, तो माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। एक छोटी सी लापरवाही और मां की ममता के इस संगम ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है।








