इंदौर | धार की भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में नियमित सुनवाई जारी है। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलीलें पेश करते हुए हिंदू पक्ष के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि खिलजी काल में मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। खुर्शीद ने ब्रिटिश म्यूजियम में रखी प्रतिमा को लेकर भी एक चौंकाने वाला दावा किया है।
मुख्य बिंदु
-
प्रतिमा पर विवाद: मुस्लिम पक्ष का दावा है कि लंदन में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू पक्ष वाग्देवी (सरस्वती) बता रहा है, वह असल में जैन समुदाय की देवी अंबिका की मूर्ति है।
-
मंदिर विध्वंस से इंकार: अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं कि किसी ‘विशिष्ट मंदिर’ को तोड़कर वहां मस्जिद बनाई गई।
-
ऐतिहासिक संदर्भ: मुस्लिम पक्ष ने ब्रिटिश उच्चायोग के 2003 के एक कथित पत्र और ऐतिहासिक पुस्तकों का हवाला देते हुए अपनी दलीलें रखीं।
-
सुप्रीम कोर्ट का हवाला: दलीलों के दौरान अयोध्या मामले (राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद) के फैसले का जिक्र करते हुए साक्ष्यों की गहन छानबीन की मांग की गई।
“तलवार के दम पर नहीं बनी मस्जिद”
मुस्लिम पक्ष की ओर से मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने अदालत में कहा कि:
-
शांतिपूर्ण निर्माण: कमालुद्दीन चिश्ती से जुड़ी इस मस्जिद का निर्माण तत्कालीन शासक ने करवाया था, न कि किसी मंदिर को तोड़कर या तलवार के दम पर।
-
खिलजी का आक्रमण: इतिहासकार ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी के संदर्भ में कहा गया कि 1305 में उसे धार को लूटने की जरूरत ही नहीं पड़ी थी, क्योंकि मांडू फतह के बाद वहां केवल शासन व्यवस्था स्थापित करनी थी।
-
राजाओं के आपसी युद्ध: मालवा क्षेत्र कई हमलों और पुनर्निर्माण का गवाह रहा है, जिनमें कई हिंदू राजाओं के आपसी युद्ध भी शामिल थे।
मालिकाना हक और सबूतों का पैमाना
वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के सामने जोर दिया कि विवादित परिसर का मालिकाना हक तय करने के लिए केवल उन दस्तावेजों और ग्रंथों को आधार बनाया जाना चाहिए जिनकी प्रामाणिकता की पूरी तरह जांच हो चुकी हो।
हिंदू पक्ष का क्या है दावा?
ज्ञात हो कि हिंदू पक्ष के अनुसार, राजा भोज ने 1034 में यहाँ सरस्वती मंदिर (भोजशाला) बनवाया था, जिसे 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति ने ढहा दिया और उसके अवशेषों से मस्जिद का निर्माण किया। वर्तमान में यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है।
खबर का सारांश
-
मामला: भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद।
-
अदालत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर पीठ।
-
मुस्लिम पक्ष के वकील: सलमान खुर्शीद।
-
नया दावा: लंदन की मूर्ति वाग्देवी नहीं, जैन देवी अंबिका की है।
-
अगली कार्यवाही: हाईकोर्ट याचिकाओं पर नियमित सुनवाई जारी रखेगा।








