मध्य प्रदेश के बासमती चावल उद्योग पर मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का काला साया मंडरा रहा है। इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालातों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग (विशेषकर लाल सागर) असुरक्षित हो गए हैं, जिससे एमपी से होने वाला बासमती का निर्यात लगभग पूरी तरह ठप पड़ गया है। रायसेन जिले सहित मध्य प्रदेश के प्रमुख बासमती उत्पादक क्षेत्रों के व्यापारियों और किसानों की चिंताएं चरम पर हैं, क्योंकि करोड़ों रुपये का माल बंदरगाहों और जहाजों पर अनिश्चितकाल के लिए अटक गया है।

शिपिंग लागत में 450% का भारी उछाल
‘अपर्णा फूड मिल एसोसिएशन’ के अनुसार, लाल सागर (Red Sea) रूट पर अस्थिरता के कारण लॉजिस्टिक्स का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है:
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किराया बढ़ा: पहले एक कंटेनर को भेजने का खर्च लगभग 2000 डॉलर आता था, जो अब बढ़कर 9000 डॉलर प्रति कंटेनर तक पहुँच गया है।
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बीमा और टैक्स: युद्ध के खतरे को देखते हुए समुद्री बीमा (Marine Insurance) और अन्य टैक्स की दरों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।
खाड़ी देशों में इन किस्मों की थी भारी मांग
मध्य प्रदेश से मुख्य रूप से ईरान और अन्य खाड़ी देशों को प्रीमियम बासमती की सप्लाई की जाती है। वर्तमान में निम्नलिखित किस्मों का निर्यात प्रभावित हुआ है:
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बासमती सेला 1509 और 1121 (सबसे अधिक मांग वाली किस्में)
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सुगंधा और शरबती चावल
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वर्तमान स्थिति: लगभग 4 लाख टन चावल या तो जहाजों पर लदा हुआ बीच समुद्र में खड़ा है या बंदरगाहों पर टर्मिनल क्लियरेंस का इंतजार कर रहा है।
मिलर्स और किसानों पर मंडराता खतरा
निर्यात रुकने का सीधा असर स्थानीय मंडियों और मिलों पर पड़ रहा है:
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आर्थिक नुकसान: एक्सपोर्टर्स का पैसा फंसने के कारण वे नई खरीदी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे मंडियों में बासमती के दाम गिरने का डर है।
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पेमेंट संकट: विदेशों से आने वाला भुगतान अटकने से मिलर्स के सामने वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) का संकट खड़ा हो गया है।
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फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स: अंतरराष्ट्रीय खरीदार बढ़ते किराए और अनिश्चितता के कारण नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं।
रायसेन: बासमती का गढ़ संकट में
रायसेन जिले से बासमती का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में जाता है। यहाँ के मिलर्स का कहना है कि यदि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए, तो बासमती उद्योग को अपूरणीय क्षति हो सकती है। फिलहाल व्यापारियों की नजरें कूटनीतिक समाधान और समुद्री रास्तों के सुरक्षित होने पर टिकी हैं।








