बालाघाट/भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। बालाघाट में छत्तीसगढ़ से जुड़े 10 खूंखार नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष अपने खतरनाक हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी नक्सलियों पर कुल ₹2.36 करोड़ का इनाम घोषित था।
सरेंडर किए गए खतरनाक हथियार
आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों ने अपने साथ कई अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी जमा किए हैं:
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AK-47: 2
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इंसास (INSAS): 2
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एसएलआर (SLR): 1
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एसएसआर (SSR): 2
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बीजीएल सेल (BGL Cell): 7
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वॉकी-टॉकी: 4
आत्मसमर्पण करने वालों में चार महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो एक से दो दशक से नक्सली संगठन से जुड़ी हुई थीं।
सबसे खूंखार नक्सली ‘कबीर’ पर ₹77 लाख का इनाम
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सबसे प्रमुख नाम सुरेंद्र उर्फ कबीर है, जो एसजेडसी (SZC) का सचिव था:
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इनाम: कबीर पर अकेले ₹77 लाख का इनाम था।
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इतिहास: वह मूल रूप से सुकमा का रहने वाला है और 1995 में संगठन से जुड़ा था। वह 2000 तक नक्सलियों के टॉप लीडर देवजी का बॉडीगार्ड रहा और बाद में ट्रेनर भी बना। 2004 से 2014 तक वह दरभा डिवीजन में मिलिट्री इन चीफ भी रहा था। कबीर AK-47 लेकर चलता था।
सीएम का संदेश: संविधान और पुनर्वास
हथियार डालने के बाद सीएम मोहन यादव ने सभी नक्सलियों को संविधान की कॉपी सौंपी और उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
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पुनर्वास का आश्वासन: सीएम ने कहा कि हथियार डालने वालों का पुनर्वास किया जाएगा और सरकार उनकी हर चीज की चिंता करेगी।
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सख्त चेतावनी: सीएम ने स्पष्ट किया कि “हथियार के बल पर संघर्ष करने की इच्छा रखने वालों से हम दबने वाले नहीं हैं, उन्हें हम ठिकाने लगाएंगे।”
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नक्सलवाद खत्म करने की समय सीमा: सीएम यादव ने 31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस के दबाव के कारण ही नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।








