सतना। जिले के उचेहरा वन परिक्षेत्र में सोमवार की शाम उस वक्त कोहराम मच गया, जब पोड़ी लेडहरा पहाड़ के जंगल में अचानक भीषण आग भड़क उठी। गर्मी की दस्तक के साथ ही शुरू हुई इस ‘दावानल’ (जंगल की आग) ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। तेज़ हवाओं और सूखे पत्तों के कारण लपटें तेज़ी से फैल रही हैं, जिससे वन्यजीवों और बहुमूल्य वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुँचने की खबर है।

न्यूज़ हेडलाइंस
-
पहाड़ पर तांडव: उचेहरा वन परिक्षेत्र के पोड़ी लेडहरा पहाड़ पर लगी आग।
-
वन संपदा पर संकट: बड़े पैमाने पर जड़ी-बूटियों और पेड़ों के जलने की आशंका।
-
मुस्तैद ग्रामीण: धुंआ देखते ही ग्रामीणों ने वन विभाग को दी सूचना, खुद भी मोर्चा संभाला।
-
वजह अज्ञात: लापरवाही या जलती बीड़ी-सिगरेट बनी आग का संभावित कारण।
पहाड़ी क्षेत्र ने बढ़ाई मुश्किल
जानकारी के मुताबिक, सोमवार देर शाम जंगल से आग की ऊंची लपटें उठती देखी गईं। पहाड़ी इलाका होने के कारण आग पर काबू पाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। सूखे पत्तों, सूखी घास और झाड़ियों ने आग के लिए ‘ईंधन’ का काम किया, जिससे आग पहाड़ के बड़े हिस्से में फैल गई है।
जमीन पर संघर्ष: मिट्टी और झाड़ियों से जंग
सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला दलबल के साथ मौके पर पहुँचा। संसाधनों की कमी के बावजूद वन कर्मी स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर पारंपरिक तरीकों से आग बुझाने में जुटे हैं।
-
फायर लाइन: आग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए झाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया जा रहा है।
-
मिट्टी का उपयोग: पानी की अनुपलब्धता वाले क्षेत्रों में मिट्टी डालकर लपटों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
लापरवाही या हादसा?
वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि आग लगने के कारणों की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि किसी राहगीर द्वारा फेंकी गई जलती हुई बीड़ी-सिगरेट या महुआ बीनने वालों द्वारा लगाई गई छोटी सी आग ने यह भयानक रूप ले लिया।
“हमारी टीम और स्थानीय लोग लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। गर्मी और हवा के कारण चुनौती बड़ी है, लेकिन स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।”
— वन विभाग अमला, सतना
वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा
पहाड़ी क्षेत्र में लगी इस आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट हो रहे हैं, बल्कि वहाँ रहने वाले जंगली जानवरों और पक्षियों के आशियाने भी उजड़ रहे हैं। यदि समय रहते आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया गया, तो नुकसान का आंकड़ा करोड़ों में पहुँच सकता है।








