होम देश/विदेश मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ उत्तरप्रदेश जॉब/वेकैंसी एंटरटेनमेंट खेल लाइफस्टाइल टेक/गैजेट फैशन धर्म

मैहर में काल बना 40 साल पुराना कुआं: बैल बचाने उतरे 3 सगे भाइयों की जहरीली गैस से मौत; बदहवास पत्नी बोली ‘चाय बन गई है, वो आते ही होंगे…’

अमरपाटन : मैहर जिले के खरमसेड़ा गांव में 3 जुलाई की शाम को हुआ हादसा अब एक चीखते हुए मातम में बदल ...

विज्ञापन

Published on:

| सतना टाइम्स

अमरपाटन : मैहर जिले के खरमसेड़ा गांव में 3 जुलाई की शाम को हुआ हादसा अब एक चीखते हुए मातम में बदल चुका है। एक पुराने, खुले पड़े कुएं में गिरे बैल को निकालने के प्रयास में एक ही परिवार के तीन युवकों की दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक युवक जिंदगी और मौत के बीच जिला अस्पताल में जूझ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में सामने आया है कि कुएं के भीतर ऑक्सीजन का स्तर पूरी तरह शून्य’ था और वहां जानलेवा मीथेन व कार्बन डाइऑक्साइड गैस का भारी रिसाव हो रहा था। इस घटना ने पूरे विंध्य अंचल को झकझोर कर रख दिया है।

बैल को निकालने के लिए चारों लोग इसी कुएं में उतरे थे। बाद में गैस के असर को जांचने के लिए गांव वालों ने बकरी को बांधकर कुएं में उतारा।

HIGHLIGHTS:

  • चंद रुपयों के लिए दांव पर लगाई जान: कुआं मालिक ने बैल निकालने के लिए 100-200 रुपये का लालच दिया था, जिसके चक्कर में तीनों मजदूर कुएं में उतर गए।

  • शून्य था ऑक्सीजन का स्तर: वरिष्ठ वैज्ञानिकों की जांच में कुएं के भीतर जानलेवा मीथेन (Methane) और CO2 की अत्यधिक मात्रा पाई गई, जिससे फेफड़े चंद सेकंड में जाम हो गए।

  • उजड़ गए तीन हंसते-खेलते परिवार: जान गंवाने वाले तीनों युवक अपने-अपने घर के इकलौते कमाने वाले थे। किसी के बूढ़े मां-बाप का सहारा छिना, तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया।

  • प्रशासन का कड़ा रुख: अमरपाटन एसडीएम आरती सिंह ने कुएं को मिट्टी डलवाकर समतल करने और कुआं मालिक पर लापरवाही का केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

  • रामचंद्र यादव सतना जिला अस्पताल में भर्ती है, उसकी हालत स्थिर है।

“पैर नीचे टिकाते ही दम घुटने लगा, मैंने कहा- जल्दी खींचो” — रामचंद्र की आपबीती

इस खूनी कुएं से जिंदा लौटकर आए एकमात्र गवाह रामचंद्र यादव ने सतना जिला अस्पताल के बेड से रोते हुए घटना का वो खौफनाक मंजर बयां किया:

“मैं तो कुएं के पास हो-हल्ला सुनकर भागा था। पता चला कि कृष्णा और वीरेंद्र बैल निकालने उतरे थे और 20 मिनट से कोई हलचल नहीं हुई। उन्हें बचाने के लिए मैं और राहुल रस्सी बांधकर नीचे उतरे। जैसे-जैसे नीचे जा रहे थे, एक अजीब सी बदबू आ रही थी। जैसे ही मैंने कुएं की तलहटी पर पैर टिकाया, मेरा सिर घूमने लगा और दम घुटने लगा। मैं बस इतना ही चिल्ला पाया— ‘हमें जल्दी ऊपर खींचो, नहीं तो मर जाएंगे।’ इसके बाद क्या हुआ, मुझे होश नहीं रहा।”

इस हादसे में राहुल यादव (34), कृष्णा यादव (28) और वीरेंद्र यादव (47) की तड़पकर मौत हो गई, जबकि रामचंद्र की हालत अब स्थिर बनी हुई है।

मृतकों के नाम:

राहुल यादव, पिता मोतीलाल (उम्र 34 वर्ष)

वीरेंद्र यादव, पिता जगदीश प्रसाद (उम्र 47 वर्ष)

कृष्णकुमार यादव, पिता रामदास (उम्र 28 वर्ष)

गंभीर घायल:

रामचंद्र यादव, पिता भानु प्रसाद (उम्र 42 वर्ष)

घायल रामचंद्र यादव पिता भानु प्रसाद उम्र(42) वर्ष को प्राथमिक इलाज के बाद सतना रेफर किया गया है जहां उसका इलाज जारी है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम को कुएं के पानी में मीथेन और Co2 की ज्यादा मात्रा मिली।

पिंकी का विलाप: “वो अमरपाटन डॉक्टर के पास गए हैं, आते ही होंगे…”

हादसे के बाद खरमसेड़ा गांव की एक झोपड़ी के सामने मातम पसरा है। मृतक कृष्णा यादव की 23 वर्षीय पत्नी पिंकी यादव की मानसिक स्थिति इस सदमे से पूरी तरह बिगड़ चुकी है। वह फटी आंखों से दरवाजे को निहारते हुए बार-बार बस एक ही बात बुदबुदा रही है:

“वो शाम को काम से आए थे, बोले कि डॉक्टर को दिखाकर आता हूं। मुझसे कहा था- गोल्डी की अम्मा, तू चाय बनाकर रखना, मैं आते ही फोन करूंगा। देखो न, चाय बन गई है… वो आते ही होंगे। गोल्डी देख बाहर, तेरे पापा आ गए क्या?”

कृष्णा अपने पीछे दो मासूम बच्चों और बूढ़े मां-बाप को छोड़ गए हैं। वहीं, मृतक राहुल के पिता मोतीलाल ने रोते हुए कहा कि उनके बुढ़ापे की लाठी छिन गई है, समाज के पैसों से बेटे का अंतिम संस्कार करना पड़ा है। तीसरे मृतक वीरेंद्र यादव अपने पीछे तीन बेटियों और एक बेटे को छोड़ गए हैं, जो दूसरों के खेतों में अधिया (बंटाई) पर काम करते थे।

एक साथ तीन लोगों की मौत से पूरे गांव में मातम है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का बड़ा खुलासा: गैस की जांच के लिए उतारी गई थी बकरी

शनिवार को कलेक्टर विदिशा मुखर्जी के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक जीके बैगा और डॉ. राज गुप्ता की टीम आधुनिक गैस डिटेक्टर मशीन लेकर कुएं पर पहुंची। वैज्ञानिकों ने बताया कि 10 साल से बंद पड़े इस 30 फीट गहरे कुएं में घुटनों तक कीचड़ और सड़न थी। इसके कारण भारी मात्रा में मीथेन गैस बन गई थी।

हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद कुएं में गैस के असर को जांचने के लिए ग्रामीणों ने एक जिंदा बकरी को रस्सी से बांधकर नीचे उतारा था, जो नीचे जाते ही तड़पने लगी थी।

पिंकी पति कृष्णा यादव को यादकर बदहवास हो जाती है।

कुआं मालिक की लापरवाही: नगर परिषद और प्रशासन लेगा एक्शन

गांव वालों का आरोप है कि रामनिवास कुशवाहा का यह कुआं पिछले 40 साल से बिना किसी जाली या मुंडेर के खुला पड़ा था, जिसकी शिकायत कई बार की गई पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

“यह घटना बेहद हृदयविदारक है। कुएं को फिलहाल सील कर दिया गया है और इसमें मिट्टी डलवाकर इसे पूरी तरह समतल कराया जाएगा। कुएं में मृत पड़े बैल के शव को निकाले बिना ही इसे बंद करने का फैसला लिया गया है ताकि कोई अन्य जनहानि न हो। कुआं मालिक के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

आरती सिंह (एसडीएम, अमरपाटन) / ख्याति मिश्रा (एसडीओपी)

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें