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सलाम इन जांबाज बेटों को: बरगी हादसे में ‘देवदूत’ बने 35 मजदूर, बिना ट्रेनिंग मौत के मुँह से खींच लाए 12 जिंदगियां

जबलपुर | शनिवार, 02 मई 2026 जबलपुर के बरगी डैम हादसे में जहाँ एक तरफ लापरवाही ने कई घर उजाड़ दिए, वहीं ...

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| सतना टाइम्स

जबलपुर | शनिवार, 02 मई 2026 जबलपुर के बरगी डैम हादसे में जहाँ एक तरफ लापरवाही ने कई घर उजाड़ दिए, वहीं दूसरी ओर जल जीवन मिशन के 35 मजदूरों ने अपनी जांबाजी से इंसानियत की नई मिसाल पेश की है। बिना किसी सुरक्षा उपकरण और प्रोफेशनल ट्रेनिंग के, इन मजदूरों ने उफनती लहरों के बीच कूदकर 12 लोगों को नया जीवन दान दिया।

वीरता की बड़ी बातें 

  • औजार छोड़ बचाई जान: पुल निर्माण में लगे मजदूरों ने क्रूज को डूबते देख तुरंत काम रोका और पानी में कूद गए।

  • 25 फीट से छलांग: बंगाल के रमजान ने शरीर पर रस्सी बांधी और ऊंचाई से कूदकर 6 लोगों को बाहर निकाला।

  • बनाई ‘ह्यूमन चेन’: बिहार और यूपी के मजदूरों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर पानी में मानव श्रृंखला बनाई।

  • बड़ा सम्मान: मध्य प्रदेश सरकार ने इन बहादुर मजदूरों को 51-51 हजार रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है।


बंगाल, बिहार और यूपी के बेटों का शौर्य

हादसे के वक्त पास ही पुल का काम चल रहा था। पश्चिम बंगाल के 22 वर्षीय रमजान ने अदम्य साहस दिखाते हुए 25 फीट ऊंची चट्टान से उफनते पानी में छलांग लगा दी। वे अकेले 6 लोगों को किनारे तक लाए, जिनमें से 4 की जान बच गई।

वहीं, बिहार के पश्चिम चंपारण के रहने वाले बिंद्रा कुमार यादव और गोरखपुर (यूपी) के राज कुमार व शिवनाथ ने अपनी जान जोखिम में डालकर रस्सियों के सहारे लोगों को बाहर निकाला। जब लहरें तेज हुईं, तो इन मजदूरों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर ‘ह्यूमन चेन’ बनाई ताकि डूबते हुए लोगों तक पहुंच आसान हो सके।

“बस एक ही धुन थी— जान बचानी है”

जांबाज मजदूर बिंद्रा यादव ने बताया, “हमने देखा कि नाव बेकाबू हो रही है, हमने चिल्लाकर पायलट को रुकने को कहा लेकिन वो नहीं माना। जैसे ही नाव डूबी, हमने रस्सियां उठाईं और कूद पड़े। हमारे पास न जैकेट थी न ट्रेनिंग, बस लगा कि किसी तरह इन लोगों को बचाना है।”

सरकार ने किया सलाम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य सरकार ने इन 35 मजदूरों की निस्वार्थ बहादुरी को सलाम करते हुए प्रत्येक को 51,000 रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की है। प्रशासन ने माना कि यदि ये मजदूर मौके पर तत्परता नहीं दिखाते, तो मृतकों का आंकड़ा कहीं अधिक डरावना हो सकता था।


प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें