रायसेन। अपनी सादगी और किसानों से सीधे जुड़ाव के लिए मशहूर शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर चर्चा में हैं। रायसेन में आयोजित ‘उन्नत कृषि मेले’ के दौरान उन्होंने एक किसान के पास लौकी से बना ‘तूमा’ (सुराही जैसा पात्र) देखा, तो वे खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने न केवल इस प्राचीन कला की खूबियां गिनाईं, बल्कि हास-परिहास के बीच उस सुराही को अपने कंधे पर टांग लिया और उसे अपने साथ ले गए।

न्यूज़ हेडलाइंस
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विलुप्त प्रजाति का संरक्षण: किसान मुंशीलाल लौकी की 26 दुर्लभ किस्मों की खेती कर रहे हैं।
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प्राचीन तकनीक: पुराने जमाने में लौकी को सुखाकर सुराही (तूमा) की तरह पानी रखने के लिए उपयोग किया जाता था।
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शिवराज का अंदाज: किसान से हंसते हुए बोले— “मुंशीलाल इसे मैं ले जा रहा हूँ, ये अब मेरा तूमा है।”
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कृषि मेला: रायसेन में देशभर के उन्नत किसान और आधुनिक कृषि यंत्रों का जमावड़ा लगा है।
लौकी की 26 किस्में और मुंशीलाल का कमाल
रायसेन में चल रहे इस कृषि मेले में मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के किसान अपनी उन्नत तकनीक और दुर्लभ बीज लेकर पहुँचे हैं।
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मुंशीलाल की मेहनत: मेले में किसान मुंशीलाल और उनकी पत्नी ने लौकी की उन किस्मों को प्रदर्शित किया जो अब लगभग विलुप्त हो चुकी हैं।
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तूमा का परिचय: उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को लौकी से बनी एक सुराही दिखाई। शिवराज ने इसे हाथ में लेकर कैमरे के सामने लोगों को बताया कि यह देसी लौकी है, जो अब आसानी से देखने को नहीं मिलती।
“इसी में पानी पियूँगा…”
शिवराज सिंह चौहान इस पारंपरिक कला से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत किसान से उसे मांग लिया।
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सहज संवाद: शिवराज ने कहा, “मुंशीलाल इसे मैं ले जा रहा हूँ, इसमें पानी पियूँगा।”
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स्वाद का राज: किसान दंपत्ति ने भी खुशी-खुशी सुराही उन्हें भेंट की और यह भी बताया कि इस पात्र में पानी का स्वाद बढ़ाने के लिए क्या डालना चाहिए। इसके बाद ‘मामा’ ने बड़े ही चुलबुले अंदाज में उस तूमा को कंधे पर टांग लिया, जिसे देख वहां मौजूद लोग मुस्कुरा उठे।
उन्नत कृषि मेला: नई और पुरानी खेती का संगम
यह मेला शिवराज सिंह चौहान के मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वे खुद पूरा समय दे रहे हैं।
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उद्देश्य: किसानों को आधुनिक यंत्रों के साथ-साथ पुरानी और पौष्टिक फसलों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रेरित करना।
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विशेष: यहाँ देशभर से आए किसान अपनी सफलता की कहानियाँ और बीज साझा कर रहे हैं।
खबर का सारांश
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स्थान: उन्नत कृषि मेला, रायसेन।
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पात्र: लौकी से बनी सुराही (तूमा)।
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किसान: मुंशीलाल (लौकी की 26 किस्मों के संरक्षक)।
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संदेश: पारंपरिक खेती और स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देना।








