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खरगोन में डॉक्टरों का ‘ब्लंडर’: सीजर के दौरान प्रसूता के पेट में छोड़ा सर्जिकल नैपकिन; कलेक्टर की जांच में दोषी पाए गए डॉक्टर और नर्स सस्पेंड, इंदौर में दोबारा ऑपरेशन कर बचाई जान

खरगोन। जिला अस्पताल में मानवता और चिकित्सा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने वाला मामला सामने आया है। सेल्दा निवासी एक महिला के सिजेरियन ...

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| सतना टाइम्स

खरगोन। जिला अस्पताल में मानवता और चिकित्सा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने वाला मामला सामने आया है। सेल्दा निवासी एक महिला के सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान गायनोकॉलॉजिस्ट और नर्सिंग ऑफिसर ने बड़ी लापरवाही बरतते हुए महिला के पेट में ‘सर्जिकल नैपकिन’ छोड़ दिया। मामला तब उजागर हुआ जब महिला को डिस्चार्ज के बाद असहनीय दर्द हुआ और इंदौर में दोबारा सर्जरी कर नैपकिन निकाला गया। कलेक्टर भव्या मित्तल की सख्ती के बाद स्वास्थ्य आयुक्त ने संबंधित डॉक्टर और नर्स को निलंबित कर दिया है।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • बड़ी लापरवाही: ऑपरेशन के बाद पेट में ही रह गया नैपकिन; इंदौर के निजी अस्पताल में हुई दोबारा सर्जरी।

  • कड़ी कार्रवाई: गायनोकॉलॉजिस्ट डॉ. मोहित गुप्ता और नर्सिंग ऑफिसर दिव्या वर्मा तत्काल प्रभाव से सस्पेंड।

  • जांच रिपोर्ट: कलेक्टर द्वारा गठित समिति ने पाया कि सर्जरी के अनिवार्य प्रोटोकॉल की अनदेखी की गई थी।

  • प्रोटोकॉल का उल्लंघन: सर्जरी के बाद उपकरणों और सामग्री की गिनती न करना महिला की जान पर पड़ा भारी।


दर्द की दास्तां: 15 दिनों तक पेट में रहा नैपकिन

ग्राम सेल्दा निवासी मनीषा घोरमाड़े को 16 मार्च को प्रसव पीड़ा के बाद खरगोन जिला अस्पताल लाया गया था।

  1. ऑपरेशन: 17 मार्च को डॉ. मोहित गुप्ता ने सिजेरियन डिलीवरी कर बच्ची को जन्म दिलवाया।

  2. डिस्चार्ज और दर्द: 21 मार्च को महिला को छुट्टी दे दी गई, लेकिन उसे लगातार पेट में तेज दर्द बना रहा।

  3. इंदौर में खुलासा: जब हालत ज्यादा बिगड़ी, तो परिजन उसे इंदौर ले गए। एमवाय अस्पताल और फिर एक निजी अस्पताल में जांच के दौरान पेट में ‘बाहरी वस्तु’ होने की पुष्टि हुई। 31 मार्च को दोबारा ऑपरेशन कर पेट से सर्जिकल नैपकिन निकाला गया।

कलेक्टर की सख्ती और प्रशासन का एक्शन

इस घटना ने सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कलेक्टर भव्या मित्तल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच समिति गठित की।

  • लापरवाही की पुष्टि: जांच में यह साफ हुआ कि जिला अस्पताल में हुए ऑपरेशन के बाद महिला ने कहीं और इलाज नहीं कराया था, जिससे सिद्ध हुआ कि नैपकिन वहीं छूटा था।

  • अनुशंसा: कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य आयुक्त को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया, जिसके बाद डॉक्टर और नर्स को निलंबित कर दिया गया।


कलेक्टर भव्या मित्तल का बयान

“जांच रिपोर्ट में डॉ. मोहित गुप्ता और नर्सिंग ऑफिसर दिव्या वर्मा की लापरवाही स्पष्ट है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे और सर्जिकल प्रोटोकॉल को और कड़ाई से लागू किया जाएगा।”


खबर का सारांश 

  • पीड़ित: मनीषा घोरमाड़े (निवासी सेल्दा)।

  • दोषी: डॉ. मोहित गुप्ता (गायनोकॉलॉजिस्ट) और दिव्या वर्मा (नर्सिंग ऑफिसर)।

  • घटनास्थल: जिला अस्पताल, खरगोन।

  • कारण: सिजेरियन के दौरान पेट में सर्जिकल नैपकिन छोड़ना।

  • वर्तमान स्थिति: दोनों दोषी सस्पेंड, पीड़िता अब खतरे से बाहर।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें