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रामावतार जग्गी: छत्तीसगढ़ की राजनीति का वो ‘स्तंभ’ जिसकी हत्या ने बदल दिया सत्ता का समीकरण; विद्याचरण शुक्ल के ‘दाहिने हाथ’ की अनसुनी कहानी

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद का पहला और सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्याकांड, जिसने तत्कालीन जोगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर ...

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| सतना टाइम्स

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद का पहला और सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्याकांड, जिसने तत्कालीन जोगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कद्दावर नेता रामावतार जग्गी की हत्या महज एक अपराध नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा मानी गई, जिसका असर आज 23 साल बाद भी छत्तीसगढ़ की गलियों में सुनाई देता है।

कौन थे रामावतार जग्गी

रामावतार जग्गी छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व थे:

  • विद्याचरण शुक्ल के सारथी: जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के सबसे भरोसेमंद और करीबी सिपहसालार थे। शुक्ल उन पर इतना भरोसा करते थे कि जग्गी को उनका ‘दाहिना हाथ’ कहा जाता था।

  • NCP के आधार स्तंभ: जब विद्याचरण शुक्ल ने कांग्रेस छोड़कर NCP का दामन थामा, तब जग्गी ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर खड़ा किया। वे NCP के प्रदेश कोषाध्यक्ष थे।

  • सफल कारोबारी: राजनीति के अलावा जग्गी का व्यापारिक जगत में भी बड़ा नाम था, जिससे उनका प्रभाव आर्थिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में मजबूत था।


4 जून 2003: वो ‘काली रात’ जिसने इतिहास बदल दिया

2003 के विधानसभा चुनाव सिर पर थे और NCP, कांग्रेस व भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी कर रही थी।

  1. हत्या का घटनाक्रम: 4 जून 2003 की रात रायपुर के मौदहापारा इलाके में रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

  2. सियासी भूचाल: इस मर्डर ने पूरे राज्य में आग लगा दी। जग्गी की हत्या के बाद राज्य की पहली अजीत जोगी सरकार सीधे निशाने पर आ गई।

  3. आरोपियों के नाम: इस हत्याकांड में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था।


हत्या के पीछे की संभावित वजहें

जानकारों के अनुसार, जग्गी की हत्या के पीछे कई राजनीतिक कारण छिपे थे:

  • NCP का बढ़ता ग्राफ: जग्गी विधानसभा चुनाव से पहले NCP के लिए भारी फंड जुटा रहे थे और संगठन को मजबूत कर रहे थे, जो सत्ताधारी दल के लिए बड़ी चुनौती बन रहा था।

  • रणनीतिक मजबूती: विद्याचरण शुक्ल की हर चुनावी रणनीति के पीछे जग्गी का दिमाग होता था। उन्हें रास्ते से हटाना शुक्ल को कमजोर करने जैसा था।


23 साल बाद फिर चर्चा में क्यों?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में इस मामले में अमित जोगी समेत अन्य आरोपियों को लेकर जो कड़ा रुख अपनाया है, उसने इस ठंडे बस्ते में जाते दिख रहे केस को फिर से जिंदा कर दिया है।

  • सत्य की जीत: रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी पिछले दो दशकों से अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हाईकोर्ट के ताजा फैसले को उन्होंने ‘सत्य की जीत’ करार दिया है।

  • अमित जोगी की मुश्किलें: कोर्ट के फैसले के बाद अमित जोगी के राजनीतिक करियर पर एक बार फिर काले बादल मंडराने लगे हैं।

निष्कर्ष

रामावतार जग्गी हत्याकांड ने छत्तीसगढ़ को यह अहसास कराया कि राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई कितनी हिंसक हो सकती है। इस एक मर्डर ने विद्याचरण शुक्ल को जोगी सरकार के खिलाफ कर दिया, जिसका फायदा अंततः भाजपा को मिला और 2003 में राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें