होम देश/विदेश मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ उत्तरप्रदेश जॉब/वेकैंसी एंटरटेनमेंट खेल लाइफस्टाइल टेक/गैजेट फैशन धर्म

MP-UP बॉर्डर पर ‘पाताल लोक’ का रहस्य: विराध कुंड में पत्थर फेंकने पर 5 मिनट बाद आती है आवाज; रामायण काल से जुड़ी है इस ‘अथाह’ गहराई की कहानी

सतना। चित्रकूट के समीप जमुनिहाई गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच एक ऐसा स्थान है, जहाँ विज्ञान आज ...

विज्ञापन

Published on:

| सतना टाइम्स

सतना। चित्रकूट के समीप जमुनिहाई गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच एक ऐसा स्थान है, जहाँ विज्ञान आज भी घुटने टेक देता है। विराध कुंड’ के नाम से मशहूर यह स्थल न केवल रामायण काल की एक अद्भुत गाथा को जीवंत करता है, बल्कि अपनी ‘अथाह’ गहराई के कारण दुनिया भर के शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। दावा किया जाता है कि इस कुंड में यदि कोई वस्तु गिराई जाए, तो उसकी आवाज सतह से टकराने में पूरे 5 से 7 मिनट का समय लेती है।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • अनसुलझा रहस्य: प्रशासन और गोताखोर आज तक नहीं माप पाए कुंड की गहराई; तल का पता लगाना नामुमकिन।

  • रामायण कनेक्शन: यहीं भगवान श्री राम ने राक्षस विराध का वध कर उसे जमीन में गाड़ा था।

  • कुदरत का अजूबा: ग्रामीणों की मांग— इसे घोषित किया जाए राष्ट्रीय पर्यटन स्थल।

  • खतरनाक गहराई: कुंड में गिरने वाली वस्तु या मवेशी का कभी नहीं चलता पता; लोग कहते हैं ‘पाताल का द्वार’।


पौराणिक कथा: जब श्री राम ने किया विराध का वध

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, वनवास के दौरान जब प्रभु श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण दंडकारण्य वन से गुजर रहे थे, तब विराध नामक राक्षस ने उन पर हमला किया था।

  1. अजेय राक्षस: विराध को ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि कोई भी अस्त्र-शस्त्र उसका वध नहीं कर पाएगा।

  2. रणनीति: तब भगवान राम और लक्ष्मण ने उसके दोनों हाथ काट दिए और उसे जीवित ही भूमि में गाड़ दिया।

  3. उद्धार: मरते समय विराध ने बताया कि वह श्रापित गंधर्व ‘तुम्बुरु’ था। प्रभु के हाथों वध होने से उसका उद्धार हुआ। जिस स्थान पर उसे गाड़ा गया, वही आज विराध कुंड कहलाता है।

5 मिनट का इंतज़ार: आखिर कितनी है गहराई?

स्थानीय ग्रामीणों और यहाँ आने वाले पर्यटकों के अनुभव हैरान करने वाले हैं:

  • ध्वनि का रहस्य: यदि आप इस कुंड में कोई पत्थर फेंकते हैं, तो वह कितनी गहराई तक जाता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी आवाज सुनने के लिए आपको 5 से 7 मिनट तक शांत खड़े होकर इंतज़ार करना पड़ता है।

  • विफल प्रयास: पूर्व में कई बार इस कुंड की गहराई नापने की कोशिश की गई, लेकिन लंबी रस्सियां और आधुनिक उपकरण भी इसके तल तक नहीं पहुँच सके।


पर्यटन और सुरक्षा की मांग

जमुनिहाई और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थल उपेक्षा का शिकार है:

  1. सुरक्षा का अभाव: खदान नुमा इस गहरे कुंड के चारों ओर कोई पुख्ता बैरिकेडिंग नहीं है, जिससे वन्यजीवों और मवेशियों के गिरने का खतरा बना रहता है।

  2. सौंदर्यीकरण: रामनवमी और अन्य पर्वों पर यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि सरकार इसे ‘रामायण सर्किट’ से जोड़कर एक सुरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे।

  3. रहस्यमयी घटना: कुछ वर्ष पूर्व एक प्रेमी युगल से जुड़ी घटना ने भी इस स्थान को चर्चा में ला दिया था, जिसके बाद से इसे ‘स्वर्ग मार्ग’ के रूप में भी देखा जाने लगा है।


प्रकृति और संस्कृति का संगम

विराध कुंड केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली संस्कृति और प्रकृति के अनसुलझे रहस्यों का अद्भुत प्रतीक है। यह स्थान हमें याद दिलाता है कि आज भी धरती पर ऐसे कई कोने हैं, जहाँ आधुनिक विज्ञान की पहुँच सीमित है।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें