उज्जैन। साल 2028 में होने वाले महाकुंभ ‘सिंहस्थ’ की प्रशासनिक तैयारियों के बीच संतों की राजनीति भी चरम पर पहुँच गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर है। उज्जैन के मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़े में हुए संतों के महासमागम में महानिर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए 13 में से 8 अखाड़ों के लिखित समर्थन का दावा किया है।

न्यूज़ हेडलाइंस
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बहुमत का गणित: 13 में से 8 अखाड़े महानिर्वाणी पक्ष के साथ, दावेदारी हुई मजबूत।
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चारों संप्रदायों का संगम: सन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल संप्रदाय के अखाड़े एक मंच पर।
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दो फाड़ में परिषद: निरंजनी बनाम महानिर्वाणी; अध्यक्ष पद को लेकर संतों में खींचतान जारी।
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सिंहस्थ 2028 का संकल्प: परिषद ने कहा—प्रशासन के साथ मिलकर महाकुंभ को बनाएंगे ऐतिहासिक।
शक्ति प्रदर्शन: लिखित और चयनित समर्थन का दावा
समागम के दौरान श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज (महानिर्वाणी) ने मीडिया से रूबरू होते हुए स्पष्ट किया कि वे ही परिषद के निर्वाचित अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। “हमें 13 में से 8 अखाड़ों का स्पष्ट और लिखित समर्थन प्राप्त है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद इन चारों प्रमुख संप्रदायों के मेल से बनी है और ये सभी हमारे नेतृत्व में एकजुट हैं।”
— श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज (महानिर्वाणी)
इन 8 अखाड़ों ने भरी हुंकार:
परिषद के अध्यक्ष पद के लिए निम्नलिखित अखाड़ों ने अपनी औपचारिक सहमति जताई है:
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महानिर्वाणी अखाड़ा
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अटल अखाड़ा
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निर्मल अखाड़ा
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नया उदासीन अखाड़ा
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बड़ा उदासीन अखाड़ा
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निर्वाणी अणि अखाड़ा
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दिगंबर अणि अखाड़ा
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निर्मोही अणि अखाड़ा
क्यों बना है विवाद?
अखाड़ा परिषद में दरार की मुख्य वजह दो ‘रवींद्र पुरी’ महाराज हैं। शेष 5 अखाड़े निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी महाराज का समर्थन कर रहे हैं, जो स्वयं को परिषद का वास्तविक अध्यक्ष बताते हैं। हालांकि, उज्जैन के इस हालिया समागम ने महानिर्वाणी पक्ष का पलड़ा भारी कर दिया है, जिससे संतों की इस सर्वोच्च संस्था में नेतृत्व का संकट और गहरा गया है।
सिंहस्थ 2028 पर सीधा असर
विवादों के बीच अखाड़ा परिषद ने यह भी साफ किया कि उनका मुख्य लक्ष्य सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन है। रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि विकास कार्यों और कुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा शुरू हो चुकी है। परिषद का प्रयास है कि सरकार और संतों के बीच बेहतर समन्वय बना रहे ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।








