विश्व प्रसिद्ध मां शारदा की नगरी मैहर में चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। 19 मार्च से शुरू हो रहे नवरात्रि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए पूरे नगर पालिका क्षेत्र में मांस-मछली की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। मैहर को मध्य प्रदेश शासन द्वारा पहले ही ‘धार्मिक नगरी’ घोषित किया जा चुका है। नवरात्रि के दौरान यहाँ देश भर से लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं, जिसे देखते हुए प्रशासन ने शांति और शुद्धता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया है।

कब से कब तक रहेगा प्रतिबंध?
एसडीएम (SDM) दिव्या पटेल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार:
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प्रारंभ: 19 मार्च 2026 (नवरात्रि का प्रथम दिन)
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समाप्ति: 27 मार्च 2026 की मध्य रात्रि तक।
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क्षेत्र: यह आदेश मैहर नगर पालिका की पूरी सीमा के भीतर प्रभावी रहेगा।
क्या-क्या रहेगा बंद?
आदेश के दायरे में निम्नलिखित चीजें शामिल हैं:
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दुकानें: मांस, मछली और मुर्गे की सभी वैध-अवैध दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।
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अंडे पर भी रोक: शहर के भीतर अंडे का क्रय-विक्रय (बेचना और खरीदना) प्रतिबंधित होगा।
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होटल और ढाबे: किसी भी होटल, रेस्टोरेंट या रेहड़ी पर मांसाहारी भोजन या अंडा परोसना अपराध माना जाएगा।
उल्लंघन करने पर ‘नए कानून’ के तहत होगी जेल
प्रशासन ने इस बार नए कानूनी प्रावधानों (BNS) का हवाला देते हुए सख्त चेतावनी दी है:
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धारा 163 (BNSS): यह प्रतिबंध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (जो पहले 144 CrPC थी) के तहत लगाया गया है।
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कठोर कार्रवाई: यदि कोई आदेश का उल्लंघन करता है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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दुकान होगी सील: चोरी-छिपे बिक्री करने वाली दुकानों को प्रशासन द्वारा तत्काल सील कर दिया जाएगा।
लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आस्था
प्रशासन का तर्क है कि चैत्र नवरात्रि मेले के दौरान मैहर में अत्यधिक भीड़ होती है। ऐसे में शहर के वातावरण को सात्विक और भक्तिमय बनाए रखना जरूरी है। पुलिस और नगर पालिका की टीमें लगातार गश्त कर इस आदेश का पालन सुनिश्चित कराएंगी।
मैहर नवरात्रि बैन: मुख्य बिंदु
| विवरण | जानकारी |
| अवधि | 19 मार्च से 27 मार्च 2026 |
| प्रतिबंधित वस्तुएं | मांस, मछली, मुर्गा और अंडा |
| लागू क्षेत्र | संपूर्ण मैहर नगर पालिका सीमा |
| कानूनी धारा | BNSS की धारा 163 और BNS की धारा 223 |
| उद्देश्य | धार्मिक भावनाओं का सम्मान और शांति व्यवस्था |








