खरगोन। जनजातीय गौरव और क्रांति सूर्य टंट्या मामा की प्रतिमा को लेकर खरगोन में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिस मूर्ति को संगमरमर का बताकर स्थापित किया गया था, वह जांच में एफआरपी (फाइबर) की निकली। इस ‘मैटेरियल घोटाले’ ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है, जिसके बाद ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और इंजीनियरों पर जांच बैठ गई है।
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मामले का खुलासा और प्रशासनिक एक्शन
नगर पालिका ने इस पूरे मामले को ‘मानवीय भूल’ करार दिया है। सीएमओ कमला कौल ने बताया कि जनजातीय गौरव दिवस की जल्दबाजी में बिना जांच किए ही मूर्ति का अनावरण कर दिया गया था।
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बड़ा कदम: मूर्ति लगाने वाले ठेकेदार नमन भट्ट को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
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विभागीय जांच: सब इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
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नया टेंडर: पुराना 9.90 लाख का टेंडर रद्द कर अब 15 लाख रुपये की लागत से नई धातु (मेटल) की मूर्ति स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
ठेकेदार का खुला चैलेंज: “50 हजार में ला दो तो 1000 खरीद लूँगा”
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे ठेकेदार नमन भट्ट ने कांग्रेस के दावों पर तीखा पलटवार किया है।
“मेरा पहला काम था और सप्लायर ने जो मूर्ति दी, उसे बिना जांचे नपा को सौंप दिया। इसमें मेरे 9 लाख रुपये खर्च हुए हैं। कांग्रेस कह रही है कि यह मूर्ति 50 हजार में आती है; अगर ऐसा है तो मुझे लाकर दें, मैं वैसी 1000 मूर्तियां खरीदने को तैयार हूँ।”— नमन भट्ट, ठेकेदार
ठेकेदार ने यह भी दावा किया है कि उसने लिखित माफी मांगते हुए मूर्ति को ‘दान’ के रूप में देने की पेशकश की है और अब तक एक भी रुपया भुगतान नहीं लिया है।
कांग्रेस का तीखा हमला: “दोषियों को बचाने की हो रही लीपापोती”
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जिला मीडिया प्रभारी राजेश मंडलोई का आरोप है कि यदि विरोध न होता, तो फाइबर की मूर्ति को ही संगमरमर बताकर भ्रष्टाचार का खेल पूरा कर लिया जाता।
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विरोध प्रदर्शन: कांग्रेस ने घोषणा की है कि इस गड़बड़ी के खिलाफ 17 जनवरी को फिर से बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
कलेक्टर की सख्ती
जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त निर्देश दिए हैं। नगर पालिका अध्यक्ष छाया जोशी का कहना है कि ठेकेदार ने अपनी गलती मान ली है और कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर व्यर्थ की राजनीति कर रहा है।








