सागर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। एक बार फिर उन्होंने अपने बयानों से देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। सागर जिले के बीना में आयोजित एक खेल कार्यक्रम के दौरान विजयवर्गीय ने न केवल ताजमहल के इतिहास पर सवाल उठाए, बल्कि बिहारियों की विनम्रता को लेकर भी एक ऐसी टिप्पणी कर दी, जिस पर विवाद गहरा सकता है।
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“मंदिर को बनाया गया मकबरा”
नगरीय आवास एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से दावा किया कि दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल मूल रूप से एक मंदिर के रूप में बनाया जा रहा था। उन्होंने तर्क देते हुए कहा:
“शाहजहां ने मुमताज को पहले बुरहानपुर में दफनाया था। लेकिन बाद में, जहाँ मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था, वहीं मुमताज के शव को लाकर दफना दिया गया और उसे मकबरे (ताजमहल) का रूप दे दिया गया।”
यह पहली बार नहीं है जब ताजमहल को मंदिर बताने का दावा किया गया है, लेकिन एक कैबिनेट मंत्री के स्तर से सार्वजनिक मंच पर यह बात कहना नई बहस को जन्म दे रहा है।
बिहारियों को लेकर विवादित टिप्पणी
राजनीति में विनम्रता के महत्व पर बात करते हुए विजयवर्गीय ने बिहार के लोगों को लेकर भी एक सामान्यीकरण (Generalization) कर दिया। उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन की तारीफ करते हुए कहा:
“यूं तो बिहारी विनम्र नहीं होते, लेकिन हमारे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन बहुत विनम्र हैं।”
उनके इस बयान को बिहार की अस्मिता से जोड़कर देखा जा रहा है और विपक्षी दल इसे मुद्दा बना सकते हैं।
बीना विधायक निर्मला सप्रे पर बोले
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्थानीय राजनीति पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने साफ कहा कि भले ही निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं, लेकिन अब वह पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं।
विपक्ष का पलटवार संभव
कैलाश विजयवर्गीय के इन बयानों के बाद अब राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू होना तय है। जहां एक तरफ ‘तेजो महालय’ (ताजमहल को मंदिर मानने वाली थ्योरी) को लेकर दक्षिणपंथी संगठन उनके समर्थन में आ सकते हैं, वहीं बिहारियों पर की गई टिप्पणी से एनडीए के भीतर और बाहर दोनों जगह असहज स्थिति पैदा हो सकती है








