मंडला (मध्य प्रदेश):मध्य प्रदेश के मंडला जिले की नैनपुर तहसील अंतर्गत ग्राम भड़िया में सरकारी योजना के तहत किए गए पौधरोपण और जमीन विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया। यहाँ एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और उनके मासूम बच्चों समेत पूरे परिवार को रात भर उनके ही घर में कैद कर दिया गया। सोमवार सुबह जब पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची, तब कहीं जाकर ताला तोड़कर परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
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क्या है विवाद की जड़?
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जयंती मरावी पिछले 10 वर्षों से एक सरकारी भूमि पर मकान बनाकर रह रही हैं। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत ने उसी विवादित भूमि को दूसरे ग्रामीण अंतराम को आवंटित कर दिया। इतना ही नहीं, जिस जमीन का मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है, उसी पर ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के तहत पौधरोपण कर दिया गया।
कांटेदार तारों का पहरा और गेट पर ताला
रविवार रात विवाद इतना बढ़ गया कि विपक्षी पक्ष ने जयंती मरावी के घर के चारों ओर कांटेदार तारों (Fencing) का घेरा बना दिया और मुख्य गेट पर बाहर से ताला जड़ दिया।
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खौफनाक रात: घर के अंदर कैद जयंती, उनके बच्चे और पूरा परिवार रात भर डर के साये में रहे। बाहर निकलने का कोई रास्ता न होने के कारण परिवार ने असुरक्षा के बीच पूरी रात काटी।
प्रशासन ने की कार्रवाई, तोड़ा गया ताला
सोमवार सुबह सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार पूजा राणा और बम्हनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
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सख्त रुख: नायब तहसीलदार ने स्पष्ट कहा कि किसी के घर पर ताला लगाना और परिवार को बंधक बनाना कानूनी और मानवीय दोनों नजरिए से अपराध है।
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रेस्क्यू: प्रशासन की मौजूदगी में गेट का ताला तोड़ा गया और घर के सामने की गई अवैध फेंसिंग को हटाया गया, जिससे परिवार मुक्त हो सका।
अदालत के फैसले का इंतजार
प्रशासन ने दोनों पक्षों को सख्त हिदायत दी है कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक कोई भी पक्ष जबरन कब्जा या अवरोध पैदा नहीं करेगा। फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
निष्कर्ष: सरकारी योजनाओं का लाभ देते समय जमीनी विवादों का निपटारा न करना अक्सर इस तरह के टकराव को जन्म देता है, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है।








