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अब हमें ही निभानी है पिता की जिम्मेदारी: सागर में सात बेटियों ने अर्थी को दिया कंधा, मुखाग्नि देकर किया विदा

सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक अत्यंत भावुक और सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने वाला दृश्य सामने आया है। अपने पिता, ...

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| सतना टाइम्स

सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक अत्यंत भावुक और सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने वाला दृश्य सामने आया है। अपने पिता, डालचंद वाल्मीकि, के निधन के बाद, उनकी सात लाड़ली बेटियों ने बेटे से बढ़कर फर्ज निभाया। जब अंतिम संस्कार के समय मुखाग्नि देने को लेकर रिश्तेदार के बेटे को आगे करने की बात आई, तो बेटियों ने साहस दिखाया और पूछा, “हम अपने पिता का अंतिम संस्कार क्यों नहीं कर सकते?”

Pita ka antim sanskar

समाज की पुरानी परंपराओं को तोड़ा

डालचंद वाल्मीकि (सागर नगर निगम में अस्थाई पद पर कार्यरत) का बीमारी के चलते नागपुर में इलाज के दौरान निधन हो गया था। उनके कोई बेटा नहीं था, केवल 7 बेटियां थीं।

  • अर्थी को कंधा: समाज की पुरानी परंपराओं को दरकिनार करते हुए, सभी सात बेटियों ने नम आंखों से अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम यात्रा की अगुवाई की।

  • मुखग्नि: बेटियां मुक्तिधाम पहुँचीं और पूरे विधि-विधान के साथ पिता की चिता को मुखग्नि देकर उन्हें अंतिम सफर पर विदा किया।

  • प्रेरणा: बड़ी बेटी के साथ-साथ महज 12 साल की सबसे छोटी बेटी ने भी अपने पिता के प्रति प्रेम दिखाते हुए मुखाग्नि देने में बराबरी से सहभागिता दिखाई। बेटियों के इस साहस को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

परिवार पर गहराया आर्थिक संकट

डालचंद के अचानक निधन से उनके परिवार पर गहरा आर्थिक संकट आ गया है।

बेटियों ने अपने कर्मों से यह संदेश दिया है कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होतीं।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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