अदानी ग्रुप ने AWL Agri Business में अपनी हिस्सेदारी तेजी से घटानी शुरू कर दी है और हाल में 13 प्रतिशत हिस्सेदारी Wilmar International की सब्सिडियरी Lence Pte को बेच दी है. इसके बाद कंपनी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह गई है और अब यह बची हुई हिस्सेदारी भी ब्लॉक डील के जरिए बेचने की तैयारी है. यह पूरा कदम अदानी की उस रणनीति से जुड़ा है जिसमें ग्रुप FMCG बिजनेस से पूरी तरह बाहर निकलकर फिर से अपने कोर इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो पर लौटना चाहता है.
नई दिल्ली. अडानी ग्रुप ने AWL Agri Business Ltd में अपनी हिस्सेदारी बेचने के प्लान को तेज कर दिया है. ताजा जानकारी के मुताबिक Adani Commodities LLP अब कंपनी में लगभग 7 प्रतिशत हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेचने की तैयारी में है. इस संभावित डील का साइज करीब 2501 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. फ्लोर प्राइस 275 रुपये प्रति शेयर रखा गया है और यह गुरुवार के क्लोजिंग प्राइस से हल्का डिस्काउंट दिखाता है.
यह कदम ऐसे वक्त आया है जब कुछ दिन पहले ही ग्रुप ने कंपनी में अपनी 13 प्रतिशत हिस्सेदारी एक बड़ी ऑफ मार्केट डील में बेच दी थी. इस ट्रांजैक्शन में Adani Commodities LLP ने 16.9 करोड़ शेयर सिंगापुर की Wilmar International की सब्सिडियरी Lence Pte Ltd को बेचे थे. यह पूरा सौदा 275 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से लगभग 4646 करोड़ रुपये का था.
यह ट्रांजैक्शन बड़े डाइवेस्टमेंट प्लान का हिस्सा है जिसे इस साल की शुरुआत में घोषित किया गया था. इसके तहत Wilmar International ने AWL Agri Business में 11 से 20 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी खरीदने की सहमति दी थी. इस खरीद के साथ Lence Pte Ltd की हिस्सेदारी बढ़कर 56.94 प्रतिशत हो गई है. दूसरी तरफ ACL यानी Adani Commodities LLP की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से घटकर अब केवल 7 प्रतिशत रह गई है.
कंपनी की तरफ से दर्ज नियामकीय जानकारी के मुताबिक ACL के पास पहले 20 प्रतिशत यानी लगभग 25 करोड़ शेयर थे. 13 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के बाद अब उसके पास केवल 9.09 करोड़ शेयर बचे हैं जो कुल इक्विटी का 7 प्रतिशत हैं. अब ग्रुप इस शेष हिस्सेदारी को भी ब्लॉक डील के जरिए बेचने की तैयारी कर रहा है.
अडानी और विल्मर का रिश्ता कैसे शुरू हुआ
AWL Agri Business पहले Adani Wilmar Ltd के नाम से जानी जाती थी. यह ज्वाइंट वेंचर साल 1999 में शुरू हुआ था जब भारत की Adani Enterprises Ltd और सिंगापुर की Wilmar International ने मिलकर पैकेज्ड फूड बिजनेस में कदम रखा. इस सहयोग से Fortune जैसे बड़े ब्रांड खड़े हुए और कंपनी देश की सबसे बड़ी एडिबल ऑयल कंपनियों में शामिल हो गई.
Wilmar International सिंगापुर की एक ग्लोबल एग्री बिजनेस कंपनी है जो एडिबल ऑयल, ग्रेन्स, शुगर और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में काम करती है. यह एशिया की सबसे बड़ी एग्री ट्रेडिंग कंपनियों में से एक है. भारत में इसकी शुरुआत Adani Wilmar के जरिए हुई और यह ज्वाइंट वेंचर लगभग 25 साल तक चला. इस ताजा डील के साथ दोनों कंपनियों के बीच 1999 में बना शेयरहोल्डर्स एग्रिमेंट भी समाप्त कर दिया गया है. इससे Wilmar अब AWL Agri Business में प्रमुख नियंत्रण वाली कंपनी बन गई है जबकि अडानी ग्रुप इस बिजनेस से बाहर निकलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव
अडानी ग्रुप जुलाई 2025 में साफ कर चुका था कि वह धीरे धीरे FMCG और फूड बिजनेस से बाहर निकलकर फिर से अपने कोर इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो पर फोकस करेगा. इसमें पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, पावर, ग्रीन एनर्जी, ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स शामिल हैं. AWL Agri Business में हिस्सेदारी बेचने का यह पूरा प्लान उसी रणनीति की अगली कड़ी है.
कंपनी के Q2 के नंबर भी दबाव दिखाते हैं
AWL Agri Business ने सितंबर तिमाही के परिणाम में 21.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 244.7 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था. खर्च बढ़ने और फाइनेंस कॉस्ट में उछाल से प्रॉफिट पर असर पड़ा. हालांकि रेवेन्यू लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर 17605 करोड़ रुपये रहा लेकिन मार्जिन पिछले साल जैसा ही रहा.








