भोपाल, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश की राजनीति में भले ही ओबीसी आरक्षण और प्रमोशन में आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे कोर्ट में वर्षों से लंबित हों, लेकिन विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, यानी बीजेपी और कांग्रेस, पूरी तरह एकजुट नज़र आ रहे हैं। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा गठित समिति ने गुपचुप तरीके से प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
वेतन-भत्ते और पेंशन वृद्धि संबंधी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को हुई, जिसकी अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने की। इस बैठक में विधायक अजय विश्नोई और सचिन सुभाषचंद्र यादव भी उपस्थित रहे।
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प्रस्ताव तैयार: राज्य शासन की समिति ने विधायकों, पूर्व विधायकों के वेतन, भत्ते और पेंशन में बढ़ोतरी के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
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अगली बैठक में मुहर संभव: पूरी संभावना है कि इस प्रस्ताव को समिति की अगली बैठक में मंजूरी दे दी जाएगी।
महाराष्ट्र, गुजरात मॉडल का अध्ययन
समिति ने यह प्रस्ताव तैयार करने से पहले अन्य राज्यों के मानकों का गहन अध्ययन किया है।
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तुलनात्मक अध्ययन: समिति ने महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के विधायकों और पूर्व विधायकों को मिलने वाले वेतन, भत्ते और पेंशन की राशि पर विस्तृत चर्चा की।
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शीतकालीन सत्र से पहले फैसला: सूत्रों के अनुसार, पूरी तैयारी है कि 30 नवंबर से पहले ही इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय ले लिया जाए और इसे आगामी शीतकालीन सत्र में मंजूरी के लिए पेश किया जा सके।
बैठक में समिति के सदस्य सचिव अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, विधान सभा के प्रमुख सचिव अरविन्द शर्मा और अपर सचिव वीरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे। समिति ने यह निर्णय लिया है कि आगामी बैठक में मध्य प्रदेश के विधायकों और पूर्व विधायकों को मिलने वाली सुविधाओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।








