सतना (मध्य प्रदेश) – सरकार भले ही नौनिहालों के पोषण और भविष्य को लेकर बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन सतना जिले की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिले के 729 आंगनवाड़ी केंद्र वर्तमान समय तक बिजली कनेक्शन के अभाव में चल रहे हैं, जिसके कारण छोटे बच्चे भीषण गर्मी और अंधेरे में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। सरकारी भवनों में लगे पंखे और लाइटें महज ‘शो-पीस’ बनकर रह गए हैं।
महादेवा हरिजन बस्ती स्थित आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 37 और 38 समेत अन्य 729 केंद्रों की स्थिति चिंताजनक है। इन सरकारी भवनों में पंखे और लाइटें लगी तो हैं, लेकिन बिजली कनेक्शन न होने से ये निष्क्रिय हैं। एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शशि शुक्ला ने बताया कि बिजली न होने से गर्मी के दिनों में बच्चों का हाल बुरा हो जाता है और उनकी तबीयत बिगड़ने लगती है, जिसके कारण अभिभावक उन्हें केंद्र भेजने से कतराते हैं।
आंकड़ों में अव्यवस्था की तस्वीर
सतना जिले में कुल 2054 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं।
| विवरण | केंद्रों की संख्या | स्थिति |
| कुल केंद्र | 2054 | – |
| किराए के मकानों में | 644 | मकान मालिक के कनेक्शन से बिजली उपलब्ध। |
| सरकारी भवनों में विद्युतीकरण | 681 | विद्युतीकरण हो चुका है। |
| सरकारी भवनों में बिजली से वंचित | 729 | बच्चे आज भी बिजली का इंतजार कर रहे हैं। |
अधिकारियों का दावा: जल्द होगा समाधान
इस गंभीर समस्या पर महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह ने नवभारत टाइम्स.कॉम से बातचीत में बताया कि 1410 सरकारी भवनों में से बचे हुए 729 केंद्रों में बिजली पहुँचाने की कवायद चल रही है।
उन्होंने दावा किया कि भोपाल स्तर से बिजली कंपनी के खाते में राशि ट्रांसफर कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ केंद्रों में सीधे कनेक्शन होना है, जबकि कुछ में पोल और वायर एक्सटेंशन का काम बाकी है। अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि यह प्रक्रिया जारी है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।








