भोपाल, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश को ‘अजब-गजब’ प्रदेश यूं ही नहीं कहा जाता। यहां जनता की गाढ़ी कमाई के ₹800 करोड़ से बनीं 400 से अधिक सरकारी इमारतें (Government Buildings) सिर्फ इसलिए खंडहर में तब्दील हो गई हैं, क्योंकि इनका उद्घाटन (Inauguration) या उपयोग शुरू नहीं हो सका है।
55 जिलों में फैली इन इमारतों की दुर्दशा सरकारी तंत्र की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।
बर्बादी की कुछ ‘भव्य’ मिसालें
राजधानी भोपाल से लेकर छोटे जिलों तक, सरकारी खर्च की बर्बादी के ये उदाहरण चौंकाने वाले हैं:
- भोपाल का भव्य स्टेडियम: ₹11 करोड़ की लागत से बना श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम 6 महीने से अधिक समय से तैयार है, लेकिन उद्घाटन के इंतजार में ही इसकी हालत खराब होती जा रही है।
- नरसिंहपुर का अस्पताल: ₹6.50 करोड़ की लागत से आयुष अस्पताल की बिल्डिंग साढ़े चार साल पहले तैयार हो गई थी। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने इसका उद्घाटन भी कर दिया, लेकिन अब डॉक्टरों की कमी बताकर इसे शुरू नहीं किया जा रहा है। दवाएं आ चुकी हैं, पर स्टाफ नदारद है।
- रायसेन का गेस्ट हाउस: रायसेन के सुल्तानगंज में ₹80 लाख की लागत से बना विश्राम गृह 6 साल से बंद पड़ा है। पीडब्ल्यूडी के एसडीओ ने स्टाफ न होने को इसका कारण बताया है।
- विदिशा का छात्रावास: शासकीय महाविद्यालय लटेरी का 2015 में बना 74 सीटों वाला छात्रावास 10 साल में एक भी छात्र के काम नहीं आया और खंडहर हो गया। कॉलेज ने इस दौरान किराए पर ₹2.8 करोड़ खर्च कर दिए।
विपक्ष हमलावर, डिप्टी CM ने दिया आश्वासन
इस मामले पर सियासत भी गरमा गई है।
- कांग्रेस का हमला: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे ‘सीधा-सीधा भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण’ बताया है। कांग्रेस नेता अब्बास हफीज ने इसकी विस्तृत जांच के लिए एक कमेटी बनाने और ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
- उप मुख्यमंत्री का बयान: इस गंभीर लापरवाही पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वे जांच करवाएंगे कि भवन बनने के बाद भी उद्घाटन क्यों नहीं हुआ। उन्होंने जल्द ही ऐसे भवनों को शुरू करवाने का आश्वासन दिया है।
सरकारी पैसे से बनी ये जर्जर इमारतें अब जनता के पैसों की बर्बादी का प्रतीक बन चुकी हैं। यह साफ है कि सिर्फ निर्माण करा देना ही पर्याप्त नहीं है, उनका समय पर उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।









