जून 2020 में राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का हवाला देते हुए भारत सरकार ने टिकटॉक समेत 59 चीनी ऐप्स को बैन कर दिया था। अब करीब 6 साल बाद इसकी वापसी की चर्चा फिर से गर्म है।

क्यों उठी वापसी की मांग? (अटकलों की वजह)
सोशल मीडिया पर इन दावों को हवा मिलने के पीछे कुछ हालिया घटनाक्रम हैं:
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भारत-चीन संबंधों में नरमी: हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक स्तर पर कुछ सुधार देखा गया है।
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Alibaba के साथ समझौता: भारत सरकार ने हाल ही में अपने ‘Startup India’ कार्यक्रम के तहत चीनी ई-कॉमर्स कंपनी Alibaba.com के साथ एक समझौता किया है। इसके अलावा AliPay पर UPI इंटीग्रेशन की खबरों ने भी सकारात्मक संकेत दिए हैं।
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अमेरिकी रणनीति: सोशल मीडिया पर चर्चा है कि भारत भी अमेरिका की तरह टिकटॉक को अपना डेटा स्थानीय सर्वर पर रखने या किसी भारतीय कंपनी को अपनी हिस्सेदारी बेचने की शर्त पर वापस ला सकता है।
सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है?
एक्स (X) पर कई यूजर्स ने पोस्ट किया है कि “टिकटॉक भारत में वापस आ गया है” या “सरकार कंपनी से बात कर रही है।” कुछ लोग एआई बॉट्स (जैसे Grok) से भी इसकी पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, ये सभी दावे व्यक्तिगत स्तर पर किए जा रहे हैं।
क्या है सरकार का स्टैंड?
फिलहाल टिकटॉक की वापसी की खबरें महज अफवाह हैं। इसके पीछे के मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:
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कोई आधिकारिक बयान नहीं: भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है कि बैन हटाने पर विचार हो रहा है।
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पुराना स्टैंड बरकरार: सरकार का रुख अभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सख्त है। जब तक डेटा सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी चिंताओं का ठोस समाधान नहीं होता, बैन हटने की संभावना न के बराबर है।
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बातचीत का अभाव: आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बाइटडांस (ByteDance) और सरकार के बीच वापसी को लेकर फिलहाल कोई सक्रिय बातचीत नहीं चल रही है।
निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर हो रहे दावे केवल कयासों पर आधारित हैं। चीन के साथ व्यापारिक संबंधों में कुछ रियायतें मिलने का मतलब यह नहीं है कि संवेदनशील डेटा वाले ऐप्स को तुरंत हरी झंडी मिल जाएगी। जब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, टिकटॉक की वापसी की खबरों को अफवाह ही माना जाना चाहिए।








