होम देश/विदेश मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ उत्तरप्रदेश जॉब/वेकैंसी एंटरटेनमेंट खेल लाइफस्टाइल टेक/गैजेट फैशन धर्म
गूगल न्यूज़ में हमारे साथ जुड़ें

सतना में ‘सिस्टम’ और ‘झोलाछाप’ ने ली मासूम की जान: कुपोषण से 4 माह की सुप्रांशी की मौत; जुड़वां भाई रीवा PICU में भर्ती, आरोपी डॉक्टर का क्लीनिक सील

सतना/मझगवां | सतना जिले के मझगवां विकासखंड के ग्राम सुरांगी में सरकारी दावों की पोल खुल गई है। यहाँ 4 महीने की मासूम ...

विज्ञापन

Published on:

| सतना टाइम्स

सतना/मझगवां | सतना जिले के मझगवां विकासखंड के ग्राम सुरांगी में सरकारी दावों की पोल खुल गई है। यहाँ 4 महीने की मासूम सुप्रांशी की कुपोषण के कारण मौत हो गई, जबकि उसका जुड़वां भाई नैतिक जिंदगी और मौत के बीच रीवा के अस्पताल में जूझ रहा है। इस मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उस झोलाछाप डॉक्टर के क्लीनिक को सील कर दिया है, जो बच्चों की गंभीर स्थिति को छिपाकर उनका गलत इलाज कर रहा था।

मुख्य बिंदु 

  • निगरानी में चूक: जन्म के समय सामान्य वजन (2.9 किलो) होने के बावजूद 4 महीने में बच्चों का वजन बढ़ने के बजाय खतरनाक स्तर तक गिर गया।

  • झोलाछाप का शिकार: परिजन पिछले 15 दिनों से बीमार बच्चों को जुगुलपुर के झोलाछाप प्रेमलाल अनुरागी के पास ले जा रहे थे, जिसने लालच में बच्चों को रेफर नहीं किया।

  • प्रशासनिक एक्शन: कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम और बीएमओ की टीम ने क्लीनिक सील कर 100 तरह की अवैध दवाइयां जब्त कीं।

  • अधिकारियों पर गाज: लापरवाही बरतने पर सेक्टर सुपरवाइजर करुणा पांडेय और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूजा पांडेय को नोटिस जारी।


“हमें किसी योजना का लाभ नहीं मिला”— मां का दर्द

मृतक बच्ची की मां विमला ने रोते हुए बताया कि उन्हें टीकाकरण के अलावा प्रशासन की किसी योजना का लाभ नहीं मिला।

  1. गाइडेंस का अभाव: मां स्तनपान कराने में असमर्थ थी, लेकिन किसी भी आशा या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें बच्चों को वैकल्पिक पोषण देने की सही सलाह नहीं दी।

  2. गलत खान-पान: सही जानकारी न होने पर 4 माह के मासूमों को गाय और बकरी का दूध दिया जा रहा था, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ गई।

झोलाछाप डॉक्टर पर एफआईआर

आरोपी प्रेमलाल अनुरागी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और म.प्र. रूजोपचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर ने स्पष्ट किया कि आरोपी बिना किसी वैध डिग्री के ग्रामीणों की जान जोखिम में डाल रहा था।


स्वास्थ्य विभाग के दावों पर सवाल

सतना जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि यह स्पष्ट रूप से मॉनिटरिंग की कमी का मामला है। जब बच्चों का वजन गिर रहा था, तब मैदानी अमले ने उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) क्यों नहीं भेजा?


खबर का सारांश 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

×

Latest News

Web Stories

Satna News

Instagram

Home

Latest News

Web Stories

Satna News

Instagram