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MP में प्रॉपर्टी का ‘शॉक’: 1 अप्रैल से 65 हजार इलाकों में महंगी होगी जमीन; रजिस्ट्री और घर बनाना दोनों हुआ भारी, जानें नया गणित

भोपाल। मध्य प्रदेश में नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही प्रॉपर्टी बाजार में आग लगने वाली है। 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश ...

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| सतना टाइम्स

भोपाल। मध्य प्रदेश में नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही प्रॉपर्टी बाजार में आग लगने वाली है। 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के 55 जिलों में करीब 65 हजार लोकेशंस पर जमीन की सरकारी दरें (गाइडलाइन) बढ़ जाएंगी। इतना ही नहीं, सरकार ने घर बनाने की आधिकारिक निर्माण दर (Construction Rate) में भी ₹1000 प्रति वर्ग मीटर का इजाफा कर दिया है। इस फैसले से अब आम आदमी को रजिस्ट्री के लिए न केवल ज्यादा स्टांप ड्यूटी देनी होगी, बल्कि मकान बनाने का बजट भी लाखों में बढ़ जाएगा।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • गाइडलाइन में उछाल: प्रदेश के 1.05 लाख स्थानों में से 65 हजार जगहों पर दरें बढ़ीं; औसत वृद्धि 16%।

  • निर्माण लागत का बोझ: शहरों में निर्माण दर ₹13,000 से बढ़कर ₹14,000 हुई; ग्रामीण क्षेत्रों में 16% की बढ़ोतरी।

  • रजिस्ट्री होगी महंगी: प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ने से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क की जेब पर सीधा असर।

  • राजधानी का हाल: भोपाल में 740 स्थानों पर 1% से लेकर 181% तक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी।


आम आदमी की जेब पर ‘दोहरी मार’

नए नियमों के लागू होने के बाद घर खरीदना और बनाना दोनों ही महंगा हो जाएगा। इसे दो बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  1. महंगी जमीन: प्रदेश में प्रॉपर्टी की औसत वृद्धि दर पिछले साल के 13% से बढ़कर अब 16% हो गई है। यानी जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने से अब उसकी रजिस्ट्री कराना महंगा होगा।

  2. महंगा निर्माण: सरकार ने नगर निगम क्षेत्रों में निर्माण दर में 7% और ग्रामीण क्षेत्रों में 16% की वृद्धि की है।

गणित: कितना बढ़ेगा आपका बजट?

अगर आप 92.93 वर्ग मीटर (लगभग 1000 वर्ग फुट) का एक मंजिला मकान बनाते हैं, तो उसका असर कुछ ऐसा होगा:

  • पुरानी लागत: ₹13,000 प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से करीब ₹12.08 लाख।

  • नई लागत: ₹14,000 प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से करीब ₹13.01 लाख।

  • सीधा बोझ: प्रति मंजिल करीब ₹93,000 का अतिरिक्त खर्चा।


भोपाल और अन्य जिलों की स्थिति

राजधानी भोपाल में औसत वृद्धि 12% रखी गई है, लेकिन कुछ प्राइम लोकेशंस पर यह वृद्धि 181% तक पहुँच गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रदेश के 38,396 स्थानों पर प्रॉपर्टी की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

रियल एस्टेट सेक्टर की चिंता

क्रेडाई (CREDAI) के अध्यक्ष मनोज मीक का कहना है कि मास्टर प्लान और भूमि उपयोग में बदलाव किए बिना हर साल दरें बढ़ाना आमजन के लिए घर खरीदना असंभव बना रहा है। निर्माण दरों में बढ़ोतरी से मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।

“निर्माण लागत में ₹1000 की बढ़ोतरी और प्रॉपर्टी गाइडलाइन में 16% का इजाफा लोगों पर दोहरी मार है। इससे न केवल घर बनाना महंगा होगा, बल्कि रजिस्ट्री के समय स्टांप ड्यूटी भी ज्यादा देनी होगी।”

रियल एस्टेट विशेषज्ञ

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें