भोपाल | मध्य प्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण की पुरानी और कम मुआवजे वाली व्यवस्था को जड़ से खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब प्रदेश में किसी भी सरकारी प्रोजेक्ट के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित करने पर उन्हें गाइडलाइन वैल्यू का 4 गुना (400%) मुआवजा दिया जाएगा। सरकार ने मुआवजे के ‘फैक्टर-1’ को बढ़ाकर अब ‘फैक्टर-2’ कर दिया है, जिससे किसानों को उनकी जमीन का दोगुना नहीं, बल्कि चार गुना दाम मिलेगा।

मुख्य बिंदु
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ऐतिहासिक बदलाव: साल 2014 से लागू फैक्टर-1 की व्यवस्था खत्म, अब दोगुने की जगह मिलेगा 4 गुना पैसा।
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सीधा फायदा: सिंचाई परियोजना, नेशनल हाईवे, रेलवे लाइन और एक्सप्रेस-वे में आने वाली जमीनों पर लागू होगी नई दरें।
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लंबित मामलों में लाभ: जिन प्रोजेक्ट्स में अभी तक ‘अंतिम अवॉर्ड’ पारित नहीं हुआ है, उन्हें भी नई दरों का लाभ मिलेगा।
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बजट का विस्तार: अकेले PWD और जल संसाधन विभाग का मुआवजा बजट अब 11 हजार करोड़ से बढ़कर 22 हजार करोड़ रुपये हो जाएगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
मुख्यमंत्री ने बताया कि अक्सर देखा गया है कि जमीन की सरकारी गाइडलाइन दर बाजार मूल्य से काफी कम होती है। इस कारण 2014 के नियमों के तहत मिलने वाला दोगुना मुआवजा भी किसानों के लिए कम पड़ता था।
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विवाद मुक्त अधिग्रहण: मुआवजे की कम राशि के कारण किसान कोर्ट जाते थे, जिससे प्रोजेक्ट्स लटक जाते थे।
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तेज विकास: 4 गुना मुआवजे से किसान खुशी-खुशी जमीन देंगे, जिससे एक्सप्रेस-वे और औद्योगिक गलियारों का काम समय पर पूरा होगा।
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पूंजी निवेश: प्रदेश में हर साल करीब 75 हजार करोड़ का निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर होता है, अब यह राशि सीधे किसानों की समृद्धि का आधार बनेगी।
इन प्रोजेक्ट्स को मिलेगी ‘सुपरफास्ट’ गति
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नर्मदा घाटी परियोजना: रुकी हुई सिंचाई योजनाओं का काम अब तेजी से पूरा होगा।
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एक्सप्रेस-वे और नेशनल हाईवे: जमीन अधिग्रहण के विवाद अब खत्म होंगे।
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रेलवे और औद्योगिक गलियारे: किसानों की सहभागिता बढ़ने से नए उद्योगों का रास्ता साफ होगा।
विशेष समिति की सिफारिश पर मुहर
इस बदलाव के लिए पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय समिति बनाई गई थी। समिति ने फिक्की, क्रेडाई और किसान संघों के साथ बैठक कर यह निष्कर्ष निकाला कि विकास की दौड़ में किसान को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। इसी आधार पर ‘फैक्टर-2’ को मंजूरी दी गई।
किसानों के खाते में बरसेगा पैसा
आंकड़ों के अनुसार, पिछले 3 वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने 10 हजार करोड़ का मुआवजा बांटा है। नई व्यवस्था के तहत यह राशि अब 20 हजार करोड़ हो जाएगी। वहीं जल संसाधन विभाग का मुआवजा बजट भी 1000 करोड़ से बढ़कर 2000 करोड़ हो जाएगा। यह पूरी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए जमा होगी।
खबर का सारांश
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क्या बदला: मुआवजा फैक्टर 1 से बढ़ाकर 2 किया गया।
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कुल लाभ: गाइडलाइन रेट का 4 गुना भुगतान।
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घोषणा की तारीख: 22 अप्रैल 2026।
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मुख्य उद्देश्य: किसानों को वाजिब दाम और विकास को रफ्तार।








