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मालवा बनेगा और भी मालामाल: 2360 करोड़ का इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, किसान बनेंगे ‘बिजनेस पार्टनर’ और रातों-रात करोड़पति

इंदौर/भोपाल |  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के नैनोद में 2360 करोड़ रुपये की लागत वाले ...

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| सतना टाइम्स

इंदौर/भोपाल |  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के नैनोद में 2360 करोड़ रुपये की लागत वाले ‘इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर’ के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया। यह प्रोजेक्ट न केवल इंदौर और पीथमपुर की कनेक्टिविटी बदलेगा, बल्कि किसानों को विकास में हिस्सेदार बनाने का एक नया ‘ग्लोबल मॉडल’ पेश करेगा।

परियोजना की 5 बड़ी विशेषताएं

  • किसान बने पार्टनर: सरकार किसानों की 60% जमीन विकसित भूखंड के रूप में वापस लौटाएगी।

  • 8-लेन सुपर एक्सप्रेस-वे: 20.28 किमी लंबा यह मार्ग दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से सीधे जुड़ेगा।

  • करोड़पति बने किसान: जमीन का 4 गुना मुआवजा और 650 करोड़ के प्लॉट मिलने से कई किसान रातों-रात समृद्ध हुए।

  • औद्योगिक हब: एग्री-प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और वेयरहाउसिंग सेक्टर को मिलेगी नई गति।

  • रोजगार का सृजन: इस कॉरिडोर से लाखों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।


देश की पहली अनूठी योजना: किसान खुद दे रहे जमीन

कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस योजना को देश की सर्वश्रेष्ठ योजना बताते हुए कहा कि यह पहली ऐसी परियोजना है जिसमें किसान खुद अपनी जमीन देने को तैयार थे। उन्होंने इसे ‘जीडीपी बढ़ाने वाला ग्रोथ सेंटर’ करार दिया। कॉरिडोर के दोनों ओर विकसित होने वाला बफर जोन भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करेगा।

कनेक्टिविटी का महाजाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुर और रतलाम मिलकर एक मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में उभर रहे हैं।

“यह सड़क केवल इंदौर से पीथमपुर तक सीमित नहीं है, यह उज्जैन से भी आगे तक जाएगी और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर को जोड़ेगी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का स्वर्णिम युग है।” – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

विकास का ‘एमपी मॉडल’

सीएम ने बताया कि प्रदेश में अब तक 9 लाख करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर उतारा जा चुका है और मध्य प्रदेश उद्योग स्थापना में देश में दूसरे नंबर पर है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि जहां पहले सिंचाई का रकबा सीमित था, वहीं अब नर्मदा जोड़ो अभियान और नई सिंचाई परियोजनाओं से मालवा और बुंदेलखंड की तस्वीर बदल रही है।


परियोजना एक नजर में:

विवरण आंकड़े
कुल लागत 2360 करोड़ रुपये
कुल लंबाई 20.28 किलोमीटर
नियोजित क्षेत्र 1316 हेक्टेयर
सड़क की चौड़ाई 75 मीटर (8-लेन)
किसानों को लाभ 4 गुना मुआवजा + 60% विकसित भूखंड

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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