भोपाल। राजधानी में कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ गई हैं। गणित और संस्कृत के पेपर परीक्षा हॉल तक पहुंचने से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इस बड़ी धांधली की पुष्टि होने के बाद जिला कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य साइबर पुलिस को जांच सौंप दी है।
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एक दिन पहले टेलीग्राम पर ‘सौदा’
हड़कंप तब मचा जब 8वीं कक्षा का संस्कृत का पेपर परीक्षा से पूरे 24 घंटे पहले ही छात्रों के पास पहुंच गया।
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बिक्री: आरोप है कि टेलीग्राम चैनलों पर इन पेपरों को धड़ल्ले से बेचा जा रहा था।
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कोड मिलान: जब लीक हुए पेपरों की जांच की गई, तो उनका ‘सेंटर कोड’ और ‘क्वेश्चन कोड’ असली पेपर से हूबहू मिल गया। इससे साफ हो गया कि यह कोई अफवाह नहीं बल्कि सुनियोजित लीक है।
लोकल कनेक्शन: हाथ से लिखे पेपर ने खोले राज
जिला परियोजना समन्वयक रवीश श्रीवास्तव के अनुसार, लीक हुए पेपर हाथ से लिखे हुए थे।
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन पेपरों पर ‘भोपाल स्पेसिफिक कोड’ अंकित थे।
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इसका मतलब है कि पेपर लीक का सोर्स कोई बाहरी गिरोह नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर सिस्टम के अंदर बैठा कोई व्यक्ति है।
35 हजार छात्रों के भविष्य पर संकट
भोपाल के 263 केंद्रों पर हो रही इस परीक्षा में अकेले 8वीं कक्षा के ही 35 हजार छात्र शामिल हैं।
“जो पेपर सोशल मीडिया पर घूम रहा था, वही परीक्षा हॉल में सामने आया। सिस्टम में इतनी बड़ी सेंधमारी ने बच्चों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।” — एक परेशान अभिभावक
कलेक्टर का कड़ा एक्शन
कलेक्टर ने पुलिस और साइबर सेल को निर्देश दिए हैं कि उन टेलीग्राम ग्रुप्स के एडमिन और सोर्स का पता लगाया जाए जहाँ से ये पेपर ओरिजिनेट हुए। शिक्षा विभाग अब इस पर विचार कर रहा है कि क्या इन विषयों की परीक्षा दोबारा आयोजित की जानी चाहिए।
प्रमुख बिंदु
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लीक विषय: कक्षा 5वीं और 8वीं के गणित और संस्कृत के पेपर।
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माध्यम: टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक दिन पहले वायरल।
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जांच: भोपाल साइबर पुलिस और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम गठित।
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पुष्टि: सेंटर कोड और क्वेश्चन कोड का मिलान सही पाया गया।








