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कूनो की ‘मुखी’ का तीसरा जन्मदिन: मौत के मुंह से निकलकर बनी 5 शावकों की जांबाज मां; ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता का सबसे बड़ा चेहरा

श्योपुर (कूनो नेशनल पार्क)। 29 मार्च 2026 का दिन भारत के वन्यजीव इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। कूनो ...

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| सतना टाइम्स

श्योपुर (कूनो नेशनल पार्क)। 29 मार्च 2026 का दिन भारत के वन्यजीव इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। कूनो की ‘राजकुमारी’ कही जाने वाली मादा चीता मुखी आज पूरे तीन साल की हो गई है। भारत की धरती पर जन्मी पहली मादा चीता मुखी का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम रोमांचक नहीं है— अनाथ होने से लेकर कूनो की सबसे कुशल शिकारी और 5 बच्चों की माँ बनने तक, मुखी ने हर कदम पर मौत को मात दी है।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • ऐतिहासिक दिन: 29 मार्च 2023 को जन्मी मुखी ने पूरे किए संघर्षपूर्ण 3 साल।

  • अनाथ से ‘सुपरमॉम’: माँ ‘ज्वाला’ ने साथ छोड़ दिया था, भाई-बहन नहीं बचे, पर मुखी ने नहीं मानी हार।

  • इतिहास रचा: नवंबर 2025 में 5 स्वस्थ शावकों को जन्म देकर बनी प्रोजेक्ट की ‘टर्निंग पॉइंट’।

  • कुशल शिकारी: विशेषज्ञों को हैरान करती है मुखी की रफ्तार और शिकार करने की तकनीक।


जब वन विभाग बना ‘माँ’: मुखी की उत्तरजीविता की कहानी

मार्च 2023 में जब नामीबियाई मादा चीता ‘ज्वाला’ ने शावकों को जन्म दिया, तब भीषण गर्मी और स्वास्थ्य चुनौतियों के कारण मुखी के अन्य भाई-बहन जीवित नहीं बच सके थे।

  1. अकेलापन: माँ ने भी मुखी को छोड़ दिया था। ऐसे नाजुक वक्त में कूनो के वन विभाग की टीम और डॉक्टरों ने ‘सरोगेट मदर’ की भूमिका निभाई।

  2. कड़ी निगरानी: चौबीसों घंटे की निगरानी और विशेष आहार के दम पर मुखी को नई जिंदगी मिली, जिसने आज उसे कूनो की सबसे जीवट चीता बना दिया है।

33 महीने की उम्र में बनी 5 बच्चों की माँ

मुखी ने न केवल कूनो के वातावरण को अपनाया, बल्कि नवंबर 2025 में 5 शावकों को जन्म देकर यह साबित कर दिया कि भारत की जलवायु चीतों के पुनर्वास के लिए पूरी तरह अनुकूल है।

  • मातृत्व: वर्तमान में मुखी अपने 5 शावकों की देखभाल पूरी निपुणता से कर रही है।

  • विशेषज्ञों की राय: प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार, मुखी का जीवित रहना और प्रजनन करना इस पूरे मिशन का सबसे बड़ा ‘माइलस्टोन’ है।


प्रोजेक्ट चीता के लिए नई उम्मीद

मुखी अब केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि कूनो की पहचान और ब्रांड एंबेसडर बन चुकी है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मुखी की सफलता यह संकेत है कि आने वाले समय में भारत के जंगलों में चीतों की रफ्तार और भी स्थाई होने वाली है।

“मुखी की सफलता यह साबित करती है कि कूनो का इकोसिस्टम विदेशी चीतों की अगली पीढ़ी के लिए पूरी तरह तैयार है। उसकी कहानी दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा है।”

वन विभाग अधिकारी, कूनो

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें