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अशोकनगर: 15 दिन के ‘वनवास’ के बाद घर पधारे ‘सिलेंडर देव’; युवक को ओलंपिक विजेता की तरह मिल रही बधाइयां, सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्टर

अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में इन दिनों खुशियों का पैमाना बदल गया है। यहाँ न तो किसी ने लॉटरी जीती ...

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| सतना टाइम्स

अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में इन दिनों खुशियों का पैमाना बदल गया है। यहाँ न तो किसी ने लॉटरी जीती है और न ही कोई चुनाव, फिर भी शहर के एक युवक रंगेश रघुवंशी को पूरा मोहल्ला और सोशल मीडिया दोस्त ‘ऐतिहासिक जीत’ की बधाइयां दे रहे हैं। कारण जानकर आप हैरान रह जाएंगे— रंगेश को 15 दिनों की लंबी जद्दोजहद और भारी मशक्कत के बाद ‘एक भरा हुआ गैस सिलेंडर’ नसीब हुआ है।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • अनोखा जश्न: गैस टंकी मिलने पर दोस्तों ने बना दिए ‘बधाई संदेश’ वाले बैनर और पोस्टर।

  • कड़ा संघर्ष: 15 दिनों से बुकिंग के बाद चक्कर काट रहे थे उपभोक्ता; 3 दिन से इंडक्शन पर बन रहा था खाना।

  • सिस्टम फेल: होम डिलीवरी ठप; खाली टंकी लेकर खुद एजेंसी पहुँचने पर मिली ‘लाल सफलता’।

  • वायरल पोस्ट: सोशल मीडिया पर चुटीले कमेंट्स— “कड़े संघर्ष के बाद मिली ऐतिहासिक उपलब्धि!”


जब ‘टंकी’ बनी ‘ट्रॉफी’: क्या है पूरा मामला?

विदिशा रोड निवासी रंगेश रघुवंशी पिछले दो हफ्तों से गैस सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रहे थे। मोबाइल से बुकिंग करने के बावजूद न तो सिलेंडर घर आ रहा था और न ही कोई संतोषजनक जवाब मिल रहा था।

सोशल मीडिया पर ‘बधाई हो! सिलेंडर हुआ है…’

रंगेश ने जैसे ही भरे हुए सिलेंडर के साथ अपनी फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की, उनके दोस्तों ने इसे ‘किसी उपलब्धि’ की तरह हाथों-हाथ लिया।

  1. बधाई पोस्टर: दोस्तों ने बाकायदा फोटो एडिट कर बैनर छाप दिए, जिन पर लिखा था— “15 दिनों के कड़े संघर्ष के बाद मिली महान सफलता, रंगेश भाई को बहुत-बहुत बधाई!”

  2. चुटीले कमेंट्स: किसी ने इसे ‘ओलंपिक गोल्ड’ बताया तो किसी ने कहा— “भाई, पार्टी तो बनती है, आखिर सिलेंडर जो मिल गया है!”


अशोकनगर में ‘गैस संकट’ के कड़वे हालात

मजाक के पीछे छिपी सच्चाई काफी डरावनी है। जिले में एलपीजी वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है:

  • नंबर का खेल: मोबाइल या मिस्ड कॉल से गैस बुकिंग नंबर नहीं लग रहे।

  • DAC का झमेला: बुकिंग होने के बाद भी ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) ग्राहकों को नहीं मिल रहा।

  • होम डिलीवरी बंद: एजेंसियों ने कर्मचारियों की कमी या भीड़ के डर से घर-घर सिलेंडर पहुँचाना बंद कर दिया है।

  • एजेंसियों पर हंगामा: शहर की गैस एजेंसियों पर रोज चक्काजाम और कर्मचारियों के साथ तीखी बहस के मामले सामने आ रहे हैं।


प्रशासन और एजेंसियां लाचार

गैस एजेंसियों का तर्क है कि मांग और आपूर्ति के बीच भारी अंतर है। वहीं, कर्मचारी एजेंसी पर उमड़ रही सैकड़ों लोगों की भीड़ को संभालने में ही पसीने-पसीने हो रहे हैं। फिलहाल, अशोकनगर के लोगों के लिए गैस सिलेंडर मिलना किसी ‘तपस्या’ के फल मिलने जैसा हो गया है।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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