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PCS Interview 2024: “काशी-अयोध्या के बाद अब मथुरा…” साक्षात्कार में पूछे गए ये तीखे सवाल, जानें एक प्रशासनिक अधिकारी का संभावित नजरिया

प्रयागराज में आयोजित PCS-2024 के साक्षात्कार (Interview) में अभ्यर्थियों से ऐसे सवाल पूछे गए जो न केवल उनके ज्ञान, बल्कि उनकी निर्णय ...

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| सतना टाइम्स

प्रयागराज में आयोजित PCS-2024 के साक्षात्कार (Interview) में अभ्यर्थियों से ऐसे सवाल पूछे गए जो न केवल उनके ज्ञान, बल्कि उनकी निर्णय क्षमता, संवेदनशीलता और निष्पक्षता की कड़ी परीक्षा लेते हैं। विशेष रूप से “काशी-अयोध्या के बाद मथुरा की बारी” जैसे संवेदनशील और समसामयिक विषयों पर आधारित प्रश्न चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। यहाँ पीसीएस साक्षात्कार में पूछे गए प्रमुख सवालों और उनके पीछे छिपे प्रशासनिक दृष्टिकोण का विश्लेषण दिया गया है: साक्षात्कार बोर्ड का उद्देश्य यह जानना था कि क्या भावी अधिकारी विवादित या संवेदनशील मुद्दों पर संवैधानिक मर्यादा और कानून के शासन को सर्वोपरि रखते हैं या नहीं।

“काशी-अयोध्या के बाद मथुरा की बारी” पर राय

यह प्रश्न अभ्यर्थी की तटस्थता जांचने के लिए था। एक आदर्श उत्तर में निम्नलिखित बिंदु होने चाहिए:

  • न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान: यह मामला वर्तमान में न्यायालय (Sub-judice) में विचाराधीन है। एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में, हमें न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

  • शांति और व्यवस्था: प्रशासन का प्राथमिक कार्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सामाजिक या धार्मिक विमर्श के दौरान क्षेत्र में शांति, सौहार्द और कानून व्यवस्था बनी रहे।

  • संवैधानिक ढांचा: भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ हर विवाद का समाधान कानूनी दायरे और साक्ष्यों के आधार पर होता है।

सोनम वांगचुक और लद्दाख का मुद्दा

अभ्यर्थी से पूछा गया कि क्या सोनम वांगचुक अपराधी हैं?

  • दृष्टिकोण: यहाँ अभ्यर्थी को यह स्पष्ट करना था कि लोकतांत्रिक विरोध और अपराध के बीच एक महीन रेखा होती है। संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन यदि प्रशासन को लगता है कि धारा 144 का उल्लंघन या सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा है, तो निरोधात्मक कार्रवाई की जाती है।

एसडीएम के रूप में अंतरजातीय विवाह विवाद

  • समाधान: ऐसे मामलों में एसडीएम को ‘काउंसलर’ और ‘प्रशासक’ दोनों की भूमिका निभानी होती है। बालिग जोड़े के कानूनी अधिकारों की रक्षा करना प्राथमिकता है, साथ ही दोनों परिवारों और समाज के बीच मध्यस्थता कर तनाव को कम करना आवश्यक है।

विधायक की सिफारिश बनाम मेरिट

  • नैतिकता का प्रश्न: बोर्ड ने पूछा कि यदि विधायक किसी अयोग्य व्यक्ति की सिफारिश करें तो आप क्या करेंगे?

  • उत्तर: “सर, मैं विधायक जी की बात सम्मानपूर्वक सुनूँगा, लेकिन निर्णय पूरी तरह से नियमों और मेरिट के आधार पर ही लूँगा। पारदर्शिता और निष्पक्षता सिविल सेवा की बुनियादी नैतिकता है।”


साक्षात्कार में पूछे गए अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

विषय पूछे गए प्रमुख प्रश्न
प्रशासनिक अंतर एसडीएम (SDM) और डीएम (DM) के अधिकारों और कार्यक्षेत्र में क्या अंतर है?
विज्ञान/तकनीकी पाइथागोरस प्रमेय का दैनिक जीवन में उपयोग; प्रिज्म के प्रकार; $CO_2$ और $CO$ में अंतर।
कृषि विकास कम उपज वाले किसानों की आय बढ़ाने के लिए आपके पास क्या ‘Action Plan’ है?
ग्रामीण विकास ग्राम प्रधान की जिम्मेदारियां और गांव के विकास के लिए 3 सबसे जरूरी चीजें।
शिक्षा ‘डमी स्कूल’ (Dummy Schools) की बढ़ती संस्कृति को आप प्रशासनिक नजरिए से कैसे देखते हैं?
भूगोल/स्थानीय हिमालय की चौड़ाई और केंद्र; प्रयागराज की नदियां (गंगा, यमुना, सरस्वती)।

एक अधिकारी के लिए ‘केमिस्ट्री’ का अर्थ?

साक्षात्कार में एक दिलचस्प सवाल पूछा गया कि दो लोगों के बीच केमिस्ट्री होने का क्या अर्थ है?”

इसका प्रशासनिक संदर्भ यह है कि किसी टीम या विभाग में अधिकारियों और अधीनस्थों के बीच आपसी तालमेल (Coordination) और विश्वास कैसा है। यदि टीम की ‘केमिस्ट्री’ अच्छी है, तो आपदा प्रबंधन या कानून व्यवस्था बनाए रखने जैसे कठिन कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें