जबलपुर:जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अफगानी नागरिक सैयद राशिद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने शासन द्वारा जारी ‘लीव इंडिया’ (भारत छोड़ो) नोटिस और दर्ज की गई एफआईआर को कानून सम्मत बताया है।
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क्या है पूरा मामला?
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भारत आगमन: सैयद राशिद 2019 में छात्र वीजा पर भारत आया था और भोपाल के एक निजी विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई कर रहा था।
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वीजा विस्तार: कोरोना महामारी के दौरान उसे मानवीय आधार पर वीजा विस्तार मिला, जिसके बाद 2022 में उसकी पढ़ाई पूरी हो गई।
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नियमों का उल्लंघन: पढ़ाई पूरी होने के बाद राशिद ने उसी विश्वविद्यालय में नौकरी शुरू कर दी। कानूनन, छात्र वीजा पर नौकरी करना प्रतिबंधित है और उसका ‘एम्प्लॉयमेंट वीजा’ (रोजगार वीजा) कभी स्वीकृत नहीं हुआ था।
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अंतिम समय सीमा: सरकार ने सहानुभूति दिखाते हुए उसका वीजा 24 मार्च 2024 तक बढ़ाया था, लेकिन अवधि समाप्त होने के बाद भी वह अवैध रूप से भोपाल में रह रहा था।
न्यायालय की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उसे UNHCR (संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त) से शरणार्थी का दर्जा प्राप्त है, इसलिए उसे भारत में रहने दिया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा:
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वीजा कानून सर्वोपरि: UNHCR का दर्जा किसी भी विदेशी को भारतीय वीजा नियमों और विदेशी अधिनियम 1946 के पालन से छूट नहीं देता।
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धारा-14 का उल्लंघन: वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भारत में रुकना सीधे तौर पर ‘विदेशी अधिनियम’ की धारा-14 का उल्लंघन है।
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संवैधानिक अधिकार: बिना वैध दस्तावेज के भारत में रहने का कोई मौलिक अधिकार किसी विदेशी नागरिक के पास नहीं है।
प्रशासनिक कार्रवाई को मिली वैधता
भोपाल के डिप्टी कमिश्नर ने 8 जनवरी 2025 को राशिद को ‘लीव इंडिया’ नोटिस जारी किया था और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी। हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को पूरी तरह वैध ठहराते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
मामले का सारांश: एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| याचिकाकर्ता | सैयद राशिद (अफगानी नागरिक) |
| न्यायालय | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच) |
| विवाद का विषय | वीजा अवधि समाप्त होने के बाद अवैध प्रवास |
| प्रमुख कानून | विदेशी अधिनियम 1946 (Foreigners Act) |
| कोर्ट का आदेश | याचिका खारिज; भारत छोड़ना अनिवार्य |








