ग्वालियर (मध्य प्रदेश):ग्वालियर के ओल्ड खेड़ापति कॉलोनी निवासी 75 वर्षीय बिहारीलाल गुप्ता (रिटायर्ड सब रजिस्ट्रार) के साथ एक करोड़ 12 लाख रुपए की साइबर ठगी हुई है। ठगों ने खुद को आईपीएस अधिकारी और सीबीआई एजेंट बताकर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाया और करीब डेढ़ महीने तक फोन के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा।

16 नवंबर से शुरू हुआ ठगी का मायाजाल
ठगी की शुरुआत 16 नवंबर 2025 को हुई, जब पीड़ित के पास एक कॉल आया:
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TRAI अधिकारी का ढोंग: ठग रोहित शर्मा ने कहा कि दिल्ली पुलिस के आदेश पर आपका आधार और मोबाइल नंबर बंद किया जा रहा है क्योंकि आपके खिलाफ अरेस्ट वारंट है।
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वर्दीधारी ठग ‘नीरज ठाकुर’: थोड़ी देर बाद व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया। सामने पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति था, जिसने खुद को IPS नीरज ठाकुर बताया। उसने दावा किया कि एक अपराधी ने कबूल किया है कि मनी लॉन्ड्रिंग में बिहारीलाल का हाथ है।
‘PM का आदेश’ और सीक्रेसी का डर
बुजुर्ग को पूरी तरह डराने के लिए ठगों ने देश की सर्वोच्च संस्थाओं के नाम का सहारा लिया:
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गोपनीयता की शर्त: ठगों ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सख्त आदेश है कि यह जांच गोपनीय रहनी चाहिए। अगर जानकारी लीक हुई तो अपराधी विदेश भाग जाएंगे और आप पर देशद्रोह लगेगा।”
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मानसिक कैद: डरे हुए बुजुर्ग को फोन काटने तक की इजाजत नहीं थी। वे 48 दिनों तक अपने ही घर में किसी से बात किए बिना बंधक बने रहे। उनके बच्चे बाहर रहते हैं, जिसका ठगों ने फायदा उठाया।
चार खातों में ट्रांसफर करवाए 1.12 करोड़
ठगों ने बुजुर्ग को विश्वास दिलाया कि उनकी संपत्ति की जांच RBI द्वारा की जानी है। जांच के नाम पर:
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पीड़ित के SBI खाते से 60 लाख रुपए।
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उनकी पत्नी के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 52 लाख रुपए।
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कुल 1 करोड़ 12 लाख रुपए चार अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के जरिए ट्रांसफर करवा लिए गए। ठगों ने बकायदा RBI की फर्जी रसीद भी व्हाट्सएप पर भेजी।
वीडियो देखकर खुला राज, अब जांच जारी
पैसे हड़पने के बाद ठगों ने अपने नंबर बंद कर लिए। कुछ दिन बाद जब बिहारीलाल ने सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े जागरूकता वीडियो देखे, तब उन्हें अहसास हुआ कि वे लुट चुके हैं।
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पुलिस कार्रवाई: ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस उन चार बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें पैसा भेजा गया था।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए सावधानियां:
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कोई भी एजेंसी फोन पर अरेस्ट नहीं करती: पुलिस, CBI, RBI या TRAI कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ या ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करते।
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पैसे की मांग: सरकारी एजेंसियां जांच के नाम पर कभी भी किसी निजी खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं करवातीं।
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डरे नहीं: यदि कोई डराए, तो तुरंत फोन काटें और नजदीकी पुलिस स्टेशन या 1930 पर कॉल करें।








