अशोकनगर (मध्य प्रदेश):रेलवे स्टेशन पर सोमवार को रेलवे की बड़ी लापरवाही और बदइंतजामी का नजारा देखने को मिला। प्लेटफॉर्म खाली न होने के कारण यात्रियों से खचाखच भरी एक पैसेंजर ट्रेन को दो प्लेटफॉर्म्स के बीच वाली ‘मेन लाइन’ पर ही रोक दिया गया। इसके चलते छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को जान जोखिम में डालकर ऊंची पटरियों से उतरना और चढ़ना पड़ा।
![]()
मालगाड़ी में आग बनी वजह
पूरा घटनाक्रम सोमवार दोपहर उस वक्त शुरू हुआ जब बीना से गुना की ओर जा रही एक कोयला लदी मालगाड़ी के पहिए (हॉट एक्सल) में अचानक आग लग गई। सुरक्षा कारणों से मालगाड़ी को प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ही रोक दिया गया, जिससे पूरी लाइन ब्लॉक हो गई।
प्लेटफॉर्म नहीं, पटरियों पर मिली ‘मंजिल’
दोपहर करीब 3 बजे जब ग्वालियर–बीना पैसेंजर (ट्रेन नंबर 51883) के आने का समय हुआ, तो प्लेटफॉर्म खाली न होने के कारण रेलवे प्रबंधन ने उसे मेन लाइन पर ही ले लिया। ट्रेन के रुकते ही यात्री असमंजस में पड़ गए। स्टेशन होने के बावजूद उन्हें प्लेटफॉर्म नहीं मिला और मजबूरी में सैकड़ों यात्रियों को पटरियों पर कूदकर उतरना पड़ा। करीब आधे घंटे तक यात्री अपनी जान हथेली पर लेकर पटरियों के बीच खड़े रहे।
विचित्र नजारा: अनाउंसमेंट बना मजाक
स्टेशन पर एक तरफ लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट हो रहा था कि “यात्री जान जोखिम में डालकर पटरियां पार न करें”, वहीं दूसरी तरफ खुद रेलवे के अधिकारी पटरियों के बीच खड़े होकर ट्रेन को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने के निर्देश दे रहे थे। यात्रियों के लिए यह स्थिति किसी उपहास से कम नहीं थी कि जब ट्रेन ही पटरी पर खड़ी है, तो वे बिना पटरी पार किए स्टेशन से बाहर कैसे जाएं?
अधिकारियों की मौजूदगी में उल्लंघन
हैरत की बात यह है कि इस दौरान रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे। वे फोन पर ट्रेन के पायलट से संपर्क कर गाड़ी को धीरे-धीरे रेंगने के निर्देश दे रहे थे, जबकि नीचे यात्री पटरियों के बीच फंसे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विभाग की इस “मजबूरी” ने किसी बड़े हादसे को न्योता दे दिया था।
निष्कर्ष: मालगाड़ी का हॉट एक्सल एक तकनीकी समस्या हो सकती है, लेकिन यात्रियों को स्टेशन के बीचों-बीच पटरियों पर उतारना रेलवे के ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ पर गंभीर सवाल उठाता है।








