नजदीकी शहर चुनने के बावजूद रीवा-सतना भेजे गए परीक्षार्थी, लाखों उम्मीदवारों के सामने चुनौती
भोपाल, मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) द्वारा आयोजित पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए जारी परीक्षा केंद्रों की सूची ने अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लाखों उम्मीदवारों में भारी नाराजगी है, क्योंकि आवेदन के समय नजदीकी शहरों को प्राथमिकता देने के बावजूद उन्हें सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं।
-
भारी विसंगति: अधिकांश उम्मीदवारों ने इंदौर, उज्जैन, खंडवा, भोपाल जैसे नजदीकी परीक्षा केंद्र विकल्प चुने थे। हालांकि, उन्हें रीवा, सतना और सिंगरौली जैसे पूर्वी जिलों में केंद्र आवंटित किए गए हैं।
-
700 किमी तक की दूरी: कई अभ्यर्थियों के लिए यह दूरी 700 से 750 किलोमीटर तक पहुंच रही है। एक अभ्यर्थी ने बताया कि उसके घर से रीवा का परीक्षा केंद्र 732 किमी दूर है, जो आर्थिक और शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण है।
लाखों आवेदन, 7,500 पद
इस बार पुलिस विभाग में कुल 7,500 पदों पर भर्ती हो रही है, जिसमें जिला पुलिस (DEF) और विशेष सशस्त्र बल (SAF) दोनों के पद शामिल हैं। ESB को इस भर्ती के लिए लाखों आवेदन प्राप्त हुए हैं।
अभ्यर्थियों पर बढ़ा बोझ
दूरस्थ परीक्षा केंद्र मिलने से छात्रों पर कई तरह का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है:
-
यात्रा का समय: 12 से 15 घंटे की लंबी यात्रा।
-
आर्थिक बोझ: यात्रा, ठहरने और खानपान का अतिरिक्त खर्च।
-
सुरक्षा चिंता: रात में अनजान शहरों में ठहरने की समस्या और सुरक्षा को लेकर चिंता।
-
परीक्षा की तैयारी पर असर: लंबी यात्रा के कारण परीक्षा से पहले आराम और तैयारी प्रभावित होना।
ESB की अलॉटमेंट प्रणाली पर सवाल, अधिकारी मौन
लंबी दूरी वाले केंद्र आवंटन ने ESB की परीक्षा केंद्र अलॉटमेंट प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी शहर में केंद्र क्षमता कम थी, तो बोर्ड को पहले ही इसके बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए थी। प्राथमिकता के आधार पर नजदीकी केंद्र देना प्रणाली की जिम्मेदारी थी।
अभ्यर्थियों ने ESB को ईमेल, हेल्पलाइन और पोर्टल के माध्यम से शिकायतें भेजी हैं और परीक्षा केंद्रों की समीक्षा की मांग की है। हालांकि, बोर्ड के अधिकारी इस पर कोई प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं, जिससे नाराजगी और बढ़ गई है।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें हैं:
-
परीक्षा केंद्रों की तुरंत समीक्षा की जाए।
-
प्राथमिकता वाले शहरों में उपलब्ध सीटों का पुनर्वितरण किया जाए।
-
जरूरत पड़े तो अतिरिक्त केंद्र भी खोले जाएं।
शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आवेदनों की संख्या अधिक होने से भीड़ केंद्रों पर बढ़ सकती थी, लेकिन 700 किमी दूर केंद्र देना तकनीकी खामी की ओर संकेत करता है।








