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रीवा: किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर 56 लाख की ‘हाई-टेक’ ठगी; AI से बनाता था बड़े अस्पतालों के फर्जी पेपर, हरदा से धराया शातिर जालसाज

रीवा। शहर के एक सराफा कारोबारी के साथ अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया ...

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| सतना टाइम्स

रीवा। शहर के एक सराफा कारोबारी के साथ अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपी आयुष उर्फ प्रियांशू पवार ने पीड़ित परिवार की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें किडनी डोनर दिलाने का झांसा दिया और चार महीने के भीतर ₹56 लाख ठग लिए। रीवा पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हरदा से गिरफ्तार कर लिया है।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • मासूमियत का फायदा: पत्नी की खराब किडनी देख परेशान कारोबारी को बनाया निशाना।

  • AI का सहारा: चैटजीपीटी (ChatGPT) जैसे एआई टूल्स से तैयार किए बंसल अस्पताल के फर्जी लेटरहेड और डॉक्यूमेंट्स।

  • ऐसे खुला राज: भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टर जब रीवा आए, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ।

  • पुलिस की दबिश: आरोपी प्रियांशू पवार हरदा से गिरफ्तार, मोबाइल में मिले ठगी के कई डिजिटल सबूत।


कैसे बुना गया ठगी का जाल?

सराफा कारोबारी दिलीप कुमार सोनी की पत्नी की दोनों किडनियां खराब हैं और वे लंबे समय से ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की तलाश कर रहे थे।

  1. पहचान का फायदा: दिलीप की बहन इंदौर में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थी, वहीं उसकी मुलाकात प्रियांशू पवार से हुई। बहन के माध्यम से प्रियांशू परिवार के संपर्क में आया।

  2. बड़ा प्रभाव दिखाया: प्रियांशू ने खुद को रसूखदार बताते हुए बड़े अस्पतालों में ऊंची पहुँच होने का दावा किया।

  3. फर्जी दस्तावेज: विश्वास जीतने के लिए उसने एआई टूल्स की मदद से भोपाल के बंसल अस्पताल के हूबहू दिखने वाले फर्जी दस्तावेज तैयार किए और डोनर मिलने का झांसा दिया।

4 महीने में 56 लाख का ट्रांजेक्शन

आरोपी ने डोनर की व्यवस्था और अस्पताल की औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किस्तों में कारोबारी से 56 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही उनकी पत्नी का ऑपरेशन हो जाएगा, लेकिन पैसे लेने के बाद भी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।


विशेषज्ञ डॉक्टर की रीवा विजिट से हुआ पर्दाफाश

1 मार्च को बंसल हॉस्पिटल भोपाल के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. विद्याकांत त्रिपाठी एक शिविर के सिलसिले में रीवा आए। दिलीप सोनी ने उनसे मुलाकात कर प्रियांशू द्वारा दिए गए दस्तावेजों का जिक्र किया। डॉक्टर ने दस्तावेजों को देखते ही उन्हें फर्जी करार दे दिया, जिससे पीड़ित के पैरों तले जमीन खिसक गई।

पुलिसिया कार्रवाई और आरोपी के कबूलनामे

जब दिलीप ने अपने पैसे वापस मांगे, तो प्रियांशू ने साफ इनकार कर दिया और धमकी देने लगा। इसके बाद पीड़ित ने रीवा एसपी से शिकायत की।

  • गिरफ्तारी: सिटी कोतवाली पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर दबिश देकर आरोपी को हरदा से धर दबोचा।

  • डिजिटल सबूत: पुलिस को आरोपी के फोन से कई एआई जेनरेटेड फर्जी फाइलें और अस्पतालों के जाली लोगो (Logo) मिले हैं।


खबर का सारांश 

  • मुख्य आरोपी: आयुष उर्फ प्रियांशू पवार (निवासी: हरदा)।

  • ठगी की राशि: ₹56,00,000।

  • ठगी का तरीका: AI टूल्स से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और लेटरहेड तैयार करना।

  • दर्ज धाराएं: धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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