सतना मध्य प्रदेश के सतना जिले में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस मुख्यालय भोपाल के विशेष निर्देशों पर चलाए जा रहे एंटी नारकोटिक्स अभियान के तहत सतना पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में नशीली टैबलेट (प्रतिबंधित दवाएं) की अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले 5 आरोपियों को धर दबोचा है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 1,656 नशीली टैबलेट, 7 एंड्रायड मोबाइल और एक मोटरसाइकिल समेत करीब पौने दो लाख रुपए का मशरूका जब्त किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
कार्रवाई 1: सिटी कोतवाली पुलिस ने रपटा पुलिया के पास दबोचे 3 तस्कर
सिटी कोतवाली थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध युवक काले रंग की शाइन बाइक पर सवार होकर उचवा टोला इलाके में ग्राहकों को नशीली दवाएं बेचने की फिराक में खड़े हैं।
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नेतृत्व और घेराबंदी: थाना प्रभारी निरीक्षक हेमंत शर्मा के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने तुरंत सतना नदी रपटा पुलिया रोड के पास घेराबंदी की और तीनों संदिग्धों को दबोच लिया।
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झोले से मिलीं 1,176 टैबलेट: बाइक के हैंडल पर टंगे प्लास्टिक के झोले की तलाशी लेने पर उसमें से भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली टैबलेट बरामद हुईं, जिनकी कुल संख्या 1,176 थी।
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गिरफ्तार आरोपी: पुलिस ने इस कार्रवाई में विवेक सिंह पटेल (निवासी बड़ा तालाब), रावेन्द्र कुशवाहा और सौरभ शुक्ला (दोनों निवासी गढ़ी मोहल्ला, थाना कोटर) को गिरफ्तार किया।
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जब्ती: आरोपियों के पास से 1,176 टैबलेट, 3 मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त बाइक समेत कुल 1 लाख 74 हजार 408 रुपए का माल जब्त किया गया।
कार्रवाई 2: सिविल लाइन पुलिस ने कब्रिस्तान के पास 2 आरोपियों को दबोचा
दूसरी कार्रवाई सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत की गई, जहां पुलिस को गढ़िया टोला कब्रिस्तान के पास नशीली टैबलेट बेचे जाने की सूचना मिली थी।
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छापा मार कार्रवाई: थाना प्रभारी निरीक्षक प्रीति विश्वकर्मा ने टीम के साथ तत्काल बताए गए स्थान पर दबिश दी और संदिग्धों को घेरकर पकड़ा।
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480 टैबलेट बरामद: पुलिस ने मौके से दिलीप उर्फ छोटू यादव (24) निवासी पौराणिक टोला और अब्दुल हक (39) निवासी पुलिस कॉलोनी बिहारी मोहल्ला को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उनके पास से 480 नशीली टैबलेट और 4 मोबाइल फोन बरामद किए गए।
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मामला दर्ज: सिविल लाइन पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) और ड्रग्स कंट्रोल एक्ट के तहत अलग-अलग मामले दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से अदालत के आदेश पर उन्हें जेल भेज दिया गया