मुख्य बातें:
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सजा परिहार से मिली आजादी: जेल मुख्यालय के निर्देशों और राज्य शासन की परिहार नीति के तहत केंद्रीय जेल सतना से 7 आजीवन बंदियों को रिहा किया गया।
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सम्मानजनक विदाई: जेल अधीक्षक लीना कोष्टा ने रिहा हुए बंदियों को श्रीफल, श्रीमद्भगवद्गीता, फलदार पौधा, लंच पैकेट, पारिश्रमिक पासबुक और रिहाई प्रमाण पत्र देकर विदा किया।
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मेहनत की अनोखी मिसाल: रिहा बंदियों में मुन्नू और गिरधारी सगे भाई हैं, जिन्होंने सजा के दौरान जेल की बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया। वहीं लोकेन्द्र सिंह और संतोष चौधरी ने जेल में काम कर 1.15-1.15 लाख रुपये कमाए।
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जिला अस्पताल में स्वच्छता श्रमदान: सांसद गणेश सिंह व अन्य जनप्रतिनिधियों ने जिला अस्पताल परिसर में सफाई अभियान चलाकर श्रमदान किया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
अपराध छोड़ समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की सीख
रिहा होने वाले बंदियों में मैहर जिले के संतोष चौधरी, छतरपुर के धर्मेन्द्र उर्फ धम्मू मिश्रा तथा पन्ना जिले के लाल उर्फ विरोचन लोधी, मुन्नू प्रजापति, गिरधारी प्रजापति, लोकेन्द्र सिंह और शहनाज खान शामिल हैं। इनमें से चार पुरुष बंदी सतना की ‘खुली जेल कॉलोनी’ में रह रहे थे। जेल अधीक्षक लीना कोष्टा ने सभी को अतीत पीछे छोड़कर समाज की मुख्यधारा में जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीने की सीख दी।
जिला अस्पताल में गूंजा ‘सेवा मेरा योगदान’ का नारा
गांधी जयंती के उपलक्ष्य में सतना जिला अस्पताल परिसर में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया। सांसद गणेश सिंह और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं झाड़ू थामकर सफाई की। कार्यक्रम से पूर्व लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर बीमारियों से बचाव के लिए स्वच्छता का महत्व समझाया।
सांसद गणेश सिंह ने कहा कि स्वच्छता केवल एक दिन का काम नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और सुरक्षित वातावरण का आधार है। उन्होंने नागरिकों से इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की।