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डिजिटल फरमान बनाम जमीनी हकीकत: नेटवर्क की तलाश में पहाड़ियों और पेड़ों पर चढ़ने को मजबूर मैहर के शिक्षक; 2 घंटे की मशक्कत से पढ़ाई भी ठप

मैहर | शिक्षा विभाग के कड़े डिजिटल निर्देशों और ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता के बीच मैहर जिले से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई ...

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| सतना टाइम्स

मैहर | शिक्षा विभाग के कड़े डिजिटल निर्देशों और ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता के बीच मैहर जिले से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। जनपद शिक्षा केंद्र रामनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत कंदवारी के मूर्तिहाई क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण शिक्षकों को ऑनलाइन हाजिरी लगाने के लिए पहाड़ियों, टीलों और पेड़ों पर चढ़ना पड़ रहा है। नेटवर्क की तलाश में घंटों बर्बाद होने से स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

मुख्य बातें:

  • नेटवर्क विहीन क्षेत्र: प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में ई-अटेंडेंस अनिवार्य है, लेकिन कंदवारी-मूर्तिहाई क्षेत्र में किसी भी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं आता।
  • पहाड़ों पर हाजिरी: समय पर ई-अटेंडेंस दर्ज करने के लिए शिक्षक रोजाना स्कूल छोड़कर पहाड़ियों और ऊंचे पेड़ों पर चढ़कर सिग्नल तलाशने को मजबूर हैं।
  • पढ़ाई पर सीधा असर: नेटवर्क के इंतजार में 1 से 2 घंटे का समय बर्बाद हो जाता है; स्क्रीन पर लगातार ‘No Internet’ या ‘502 Bad Gateway’ जैसी तकनीकी खामियां नजर आती हैं।
  • शिक्षकों की मांग: क्षेत्र में तुरंत नया मोबाइल टावर लगाया जाए और जब तक नेटवर्क की स्थायी व्यवस्था न हो, तब तक ऑफलाइन अटेंडेंस की अनुमति या समय सीमा में छूट दी जाए।

“जब गांव में नेटवर्क ही नहीं, तो डिजिटल हाजिरी कैसे?” — शिक्षकों और ग्रामीणों का तीखा सवाल

कंदवारी और मूर्तिहाई क्षेत्र के शिक्षकों का कहना है कि वे डिजिटल व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना बुनियादी ढांचे (नेटवर्क टावर) के इस व्यवस्था को लागू करना व्यावहारिक नहीं है। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की बाध्यता के कारण उन्हें अपने अध्यापन कार्य का समय मोबाइल सिग्नल तलाशने में गंवाना पड़ता है।
शिक्षकों ने बताया कि केवल ई-अटेंडेंस ही नहीं, बल्कि आपातकालीन फोन कॉल, ऑनलाइन शैक्षणिक कार्य, डिजिटल पेमेंट और परिजनों से संपर्क जैसी दैनिक जरूरतें भी नेटवर्क न होने से पूरी तरह ठप पड़ी हैं।

बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन

ग्रामीणों और अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि कंदवारी-मूर्तिहाई क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन और शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब धरातल पर मोबाइल सिग्नल तक मौजूद नहीं हैं, तो सरकारी कागजों में चल रहा यह ‘डिजिटल फरमान’ किस आधार पर थोपा जा रहा है?

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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