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शाजापुर: मौत बनकर टूटा मधुमक्खियों का झुंड; 24 भेड़ों की दर्दनाक मौत, बचाने उतरा चरवाहा भी जिंदगी-मौत के बीच

शाजापुर/शुजालपुर। राजस्थान से सैकड़ों मील दूर मध्य प्रदेश की धरती पर रोजी-रोटी की तलाश में आए चरवाहों पर कुदरत का कहर टूट ...

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| सतना टाइम्स

शाजापुर/शुजालपुर। राजस्थान से सैकड़ों मील दूर मध्य प्रदेश की धरती पर रोजी-रोटी की तलाश में आए चरवाहों पर कुदरत का कहर टूट पड़ा। तिलावद पुलिस चौकी के ग्राम सलकनखेड़ी में मधुमक्खियों के एक विशाल झुंड ने भेड़ों के डेरे पर अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में देखते ही देखते 24 भेड़ों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई, जबकि अपनी आजीविका को बचाने की कोशिश में मुख्य चरवाहा भी गंभीर रूप से घायल हो गया है।

न्यूज़ हेडलाइंस

  • प्रकृति का प्रहार: हजारों मधुमक्खियों ने 350 भेड़ों के रेवड़ (झुंड) को घेरा।

  • बड़ी आर्थिक क्षति: राजस्थान के जालौन से आए चरवाहों की 24 भेड़ें मौके पर ही खत्म।

  • चरवाहा घायल: भेड़ों को बचाने कूदे हरतीगा राम की हालत नाजुक, सीहोर रेफर।

  • मुआवजे की गुहार: बेसहारा हुए पशुपालकों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार।


राजस्थान से आए थे चरागाह की तलाश में

जानकारी के अनुसार, राजस्थान के जालौन जिले (तहसील आहोर) के ग्राम काम्बा निवासीरतीगा राम देवासी अपने साथियों के साथ करीब 350 भेड़ें लेकर मध्य प्रदेश के चरागाहों की ओर आए थे। शनिवार को जब उनका दल ग्राम सलकनखेड़ी के पास रुका हुआ था, तभी अचानक मधुमक्खियों के एक झुंड ने उन पर हमला कर दिया।

मदद की कोशिश पड़ी भारी

हजारों मधुमक्खियों को अपनी भेड़ों पर टूटते देख हरतीगा राम ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन मधुमक्खियों ने उन्हें भी नहीं बख्शा। हमले में हरतीगा राम और उनके साथी नाथा जी लहूलुहान हो गए। हरतीगा राम की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत सीहोर अस्पताल भेजा गया है।


प्रशासनिक और चिकित्सा कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए तिलावद पुलिस चौकी प्रभारी घनश्याम बैरागी टीम के साथ मौके पर पहुँचे।

  • पोस्टमार्टम: पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत 24 भेड़ों का मौके पर ही पोस्टमार्टम किया है।

  • पंचनामा: पुलिस ने घटना का पंचनामा तैयार कर जांच शुरू कर दी है।


मुआवजे के लिए तड़प रहे पशुपालक

राजस्थान से आए इन गरीब चरवाहों के लिए यह केवल भेड़ों की मौत नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का अंत है। उनके साथियों ने प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे परदेस में बेसहारा हो गए हैं और इतनी बड़ी आर्थिक क्षति की भरपाई बिना सरकारी मदद के मुमकिन नहीं है।

“हमारी रोजी-रोटी ये भेड़ें ही थीं। अब हम घर कैसे लौटेंगे? सरकार से विनती है कि हमें उचित मुआवजा दिया जाए।”

साथी चरवाहा

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें